तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए सांसद मंगलवार को पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। टीएमसी की मुखर और तेजतर्रार सांसद के रूप में पहचान रखने वाली सायोनी घोष ने भी हाल ही में एनसीपीआई का दामन थामा है और उन्होंने पहली बार एनडीए की संसदीय बैठक में हिस्सा लिया।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच राष्ट्रीय राजनीति में छात्र आंदोलनों और शिक्षा सुधार पर बहस तेज है। इसी बीच सांसद सायोनी घोष ने युवाओं और छात्रों की भूमिका पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "Gen Z हमारे देश की धड़कन है।" उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं ने यह साबित किया है कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और नागरिक अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठा सकते हैं।
सायोनी घोष ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय दल की बैठक में पहली बार शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान की। हाल ही में उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) का दामन थामा है और पहली बार एनडीए की संसदीय बैठक का हिस्सा बनीं।
पहली NDA संसदीय बैठक का अनुभव साझा किया
सायोनी घोष ने बताया कि एनडीए संसदीय दल की यह बैठक उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रही। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उनके अनुसार बैठक में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), ब्लू इकोनॉमी और आर्थिक विकास से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं। उन्होंने कहा कि पहली बार सांसद बनने के बाद इस तरह की बैठकों से नीति निर्माण की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलता है।
‘Gen Z देश की सबसे बड़ी ताकत’

छात्र आंदोलनों और युवाओं की भूमिका पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सायोनी घोष ने कहा कि देश के युवा केवल आलोचना नहीं करना चाहते, बल्कि वे शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों जैसे मुद्दों को गंभीरता से देख रही है।
उनके अनुसार, हाल के छात्र प्रदर्शनों ने यह संदेश दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है और उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। सायोनी ने कहा कि छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया और शिक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े कदमों पर चर्चा को गति मिली।
पेपर लीक रोकने वाले विधेयक का किया समर्थन
बातचीत के दौरान सायोनी घोष ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill का भी समर्थन किया। उनका कहना था कि यदि कोई कानून छात्रों के हित में लाया जा रहा है, तो उस पर सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना सभी का अधिकार है, लेकिन यदि किसी विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है, तो उस पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विचार किया जाना चाहिए।
सायोनी के अनुसार, संसद में किसी भी विधेयक पर विस्तृत चर्चा आवश्यक होती है ताकि सभी पक्ष अपनी राय रख सकें और आवश्यक सुधारों को शामिल किया जा सके।
शिक्षा सुधार पर बढ़ी राष्ट्रीय बहस
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों ने देशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। विभिन्न छात्र संगठनों और युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त कानूनी प्रावधानों की मांग की है। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नए कानूनी प्रावधानों और संशोधनों पर काम कर रही है। इस विषय पर संसद के भीतर और बाहर लगातार बहस जारी है।
सायोनी घोष के बयान को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने युवाओं की जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी की सराहना की। हालांकि, छात्र आंदोलनों, पुलिस कार्रवाई और संबंधित राजनीतिक घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय है।










