झारखंड में कांग्रेस की कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता, ‘सांप’ वाले विवादित बयान पर के. राजू ने साधी चुप्पी, सीएम से जल्द हो सकती है मुलाकात

झारखंड कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, माइनिंग माफिया और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। के. राजू ने मुख्यमंत्री से बातचीत का ऐलान किया।

झारखंड कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई। के. राजू ने माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक सुधारों पर भी ध्यान देने की मांग की।

रांची: झारखंड कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा है कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जल्द ही बातचीत होगी। मुख्यमंत्री फिलहाल असम में चुनावी सभाओं में व्यस्त हैं, इसलिए बातचीत असम चुनाव के बाद होने की संभावना है। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

के. राजू ने कहा कि कांग्रेस राज्य में विधि-व्यवस्था को लेकर सजग है और हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई उचित स्तर की नहीं हो रही है और लगभग 70 हजार शिक्षक पद रिक्त हैं। इसके साथ ही उन्होंने समन्वय समिति और 20 सूत्री कमेटियों के गठन की भी मांग उठाई।

झामुमो के साथ गठबंधन

के. राजू ने कहा कि असम चुनाव में झामुमो के साथ कांग्रेस का गठबंधन नहीं होने पर अब इस विषय पर कोई तत्काल बातचीत का मतलब नहीं है। दोनों दलों के प्रदर्शन और आगामी राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में बातचीत हो सकती है।

इससे पहले के. राजू चाईबासा में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान नेताओं को बधाई भी दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं की सराहना की गई, जबकि हारने वाले नेताओं की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं ली।

राज्यसभा चुनाव पर चुप्पी

राज्यसभा चुनाव को लेकर के. राजू ने कुछ भी बोलने से परहेज किया। झारखंड में दो सीटों पर महागठबंधन को जीत हासिल करने के लिए 54 से अधिक मतों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में आईएनडीआईए गठबंधन के पास झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के चार और माले के दो विधायक हैं, जिससे कुल प्रथम वरीयता 56 मत बनते हैं।

यह स्थिति कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि नई सरकार के गठन के बाद से ही पार्टी को सरकार के दबाव में काम करना पड़ रहा है। कुछ कांग्रेस विधायकों ने पार्टी आलाकमान से मिलकर यह शिकायत भी की थी।

पार्टी के भीतर बदलाव 

हाल के समय में कांग्रेस में कुछ नेताओं को अधिक महत्व मिला है। इसमें राजेश कच्छप, सुरेश बैठा, नमन विक्सल कोंगाड़ी, भूषण बाड़ा और सोनाराम सिंकू शामिल हैं। वहीं, पूर्व विधायकों योगेंद्र साव, निर्मला देवी और अम्बा प्रसाद ने सरकार विरोधी बयान देकर पार्टी को असहज किया है। अम्बा केंद्रीय टीम में सचिव भी हैं और तीनों पूर्व विधायकों ने लगातार राज्य सरकार के खिलाफ बयान दिए हैं।

माइनिंग माफिया और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन

के. राजू ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि हाल ही में हजारीबाग के विष्णुगढ़ में बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना और धनबाद में एक विशेष समुदाय के व्यक्ति को सड़क पर पैरेड कराए जाने की घटनाओं के खिलाफ भी कांग्रेस कार्रवाई की मांग कर रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का हमला फिलहाल बीडीओ, थानेदार, डीएस और एसपी तक सीमित है और राज्य सरकार के खिलाफ पार्टी ने अब तक कोई बड़ा सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।

झामुमो नेताओं के विवादित बयान पर कांग्रेस की चुप्पी

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने झामुमो नेताओं के विवादित बयानों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जब मीडिया ने उनसे पूछा कि एक झामुमो नेता ने कांग्रेस को सांप करार दिया है, तो उन्होंने जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस तमाम मुद्दों पर मुख्यमंत्री से बात करेगी और उनका ध्यान कानून-व्यवस्था, माइनिंग माफिया और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर केंद्रित रहेगा।

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि ‘सांप’ का उदाहरण भाजपा को लेकर दिया गया था, जिससे यह विवाद और स्पष्ट हो गया।

के. राजू ने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता का विषय है। लगभग 70 हजार शिक्षक पद रिक्त हैं और स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही। इसके अलावा समन्वय समिति और 20 सूत्री कमेटियों के गठन की आवश्यकता बताई गई, ताकि शिक्षा और प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

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