झुंझुनूं में संविधान और सामाजिक न्याय को लेकर प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन

झुंझुनूं मे भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा ने संविधान, सामाजिक न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी 11 मांगो को लेकर कलेक्ट्रेट मे ज्ञापन सौंपा।

झुंझुनूं में भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा ने संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मॉब लिंचिंग रोकने सहित 11 मांगें रखीं। 

झुंझुनू:  में बुधवार को संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों के मुद्दों को लेकर बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से विरोध मार्च निकालते हुए जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शनकारियों ने देश में अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस दौरान “संविधान बचाओ” और “सामाजिक न्याय सुनिश्चित करो” जैसे नारे लगाए गए।

देशव्यापी आंदोलन के तहत हुआ प्रदर्शन

यह प्रदर्शन देशव्यापी आंदोलन के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वर्तमान समय में संविधान के मूल सिद्धांतों—समानता, स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता—को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।

संगठनों ने आरोप लगाया कि देश में सामाजिक संतुलन और बहुलतावादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे कमजोर वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। प्रदर्शन के बाद दिए गए ज्ञापन में राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।

11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कुल 11 प्रमुख मांगें शामिल कीं, जिनमें संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, सामाजिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।

1. विवादित कानूनों की समीक्षा की मांग

ज्ञापन में नागरिकता संशोधन कानून (CAA), समान नागरिक संहिता (UCC) और वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 जैसे कानूनों को वापस लेने की मांग की गई। संगठनों का कहना है कि ये कानून देश की बहुलतावादी संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।

2. धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा

संविधान के अनुच्छेद 25 से 29 तक दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा की मांग की गई। इसमें पूजा, शिक्षा और सांस्कृतिक अधिकारों में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को रोकने की बात कही गई।

3. मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून

भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) और धार्मिक आधार पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून लागू करने की मांग की गई।

4. झूठे मामलों में जेल में बंद लोगों की रिहाई

ज्ञापन में कहा गया कि केवल शक के आधार पर जेल में बंद अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें रिहा किया जाए।

5. सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून

देश में धर्म आधारित हिंसा को रोकने के लिए एक विशेष “कम्यूनल वायलेंस प्रिवेंशन एक्ट” लागू करने की मांग की गई।

6. धार्मिक स्थलों की सुरक्षा

मस्जिद, मदरसा, दरगाह और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की गई।

7. उपासना स्थल अधिनियम का पालन

प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के सख्त पालन की मांग करते हुए कहा गया कि सभी धार्मिक स्थलों की 15 अगस्त 1947 की स्थिति को बनाए रखा जाए।

8. अनुच्छेद 341(3) में संशोधन की मांग

धर्म के आधार पर आरक्षण से संबंधित पाबंदी हटाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी।

9. प्रतिनिधित्व में समानता

SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में शासन, प्रशासन, शिक्षा और रोजगार में प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई।

10. जातिगत जनगणना की मांग

देश में जाति आधारित जनगणना कराकर वास्तविक सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों के आधार पर नीति निर्धारण करने की मांग रखी गई।

11. नफरत फैलाने वाले संगठनों पर कार्रवाई

धर्म और जाति के नाम पर हिंसा या नफरत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।

वक्ताओं ने संविधान की रक्षा पर दिया जोर

प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के जिला संयोजक नजमुद्दीन और प्रदेश महासचिव सहित अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और संविधान के मूल ढांचे को सुरक्षित रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ नीतिगत फैसलों के कारण सामाजिक समानता और विविधता पर असर पड़ रहा है, जिससे समाज में असंतुलन की स्थिति बन सकती है।

कलेक्ट्रेट परिसर में सौंपा गया ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सभी 11 मांगों को विस्तार से शामिल किया गया और मांग की गई कि इन पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाए।

Jhunjhunu प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित स्तर पर भेजने की बात कही है।

सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना मुद्दा

यह प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य संविधान और समानता की रक्षा है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा विभिन्न विचारधाराओं के बीच बहस का कारण भी बन रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, जहां विभिन्न समूह अपने विचार और मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखते हैं।

संविधान, समानता और सामाजिक न्याय पर जोर

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य देश के संविधान, सामाजिक न्याय और सभी वर्गों के समान अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी समुदायों को समान अवसर और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

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