जिनपिंग बोले- दुनिया जंगलराज की तरफ बढ़ रही, पुतिन संग बैठक में ईरान जंग रोकने की अपील

बीजिंग में पुतिन से मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने ईरान जंग रोकने की अपील की। दोनों नेताओं ने नई वैश्विक स्थिरता चर्चा की। जिनपिंग बोले जंगलराज बढ़ रहा

बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मुलाकात के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान युद्ध पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया फिर जंगलराज की ओर बढ़ रही है और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए युद्ध रोकना बेहद जरूरी है।

बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के साथ उच्चस्तरीय बैठक के दौरान जिनपिंग ने कहा कि यदि युद्ध और एकतरफा सैन्य कार्रवाइयां नहीं रुकीं, तो दुनिया फिर “जंगलराज” की ओर बढ़ सकती है।

चीनी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक शक्तियां नए भू-राजनीतिक समीकरणों में उलझती दिखाई दे रही हैं। जिनपिंग ने कहा कि लगातार युद्ध, सैन्य दबाव और शक्ति प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ रहे हैं, जिससे वैश्विक स्थिरता और विश्व व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है।

बीजिंग में पुतिन का भव्य स्वागत

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन बुधवार को आधिकारिक दौरे पर चीन पहुंचे, जहां बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में उनका औपचारिक स्वागत किया गया।

दोनों नेताओं ने रेड कार्पेट पर साथ चलते हुए गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। सैन्य बैंड ने चीन और रूस के राष्ट्रगान भी बजाए। इस दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

यह मुलाकात केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे बदलती वैश्विक राजनीति के बीच रूस-चीन रणनीतिक साझेदारी के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

जिनपिंग बोले- युद्ध से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था खतरे में

बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां सैन्य टकराव और शक्ति राजनीति अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वैश्विक नियमों को कमजोर कर रही है।

उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा संघर्ष नहीं रोके गए, तो वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। जिनपिंग ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध दुनिया को अस्थिर बना रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह बयान मिडिल ईस्ट संकट, यूक्रेन युद्ध और वैश्विक शक्ति संघर्ष की ओर संकेत था।

पुतिन और जिनपिंग ने “दबदबे की राजनीति” का किया विरोध

बीजिंग बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक राजनीति में “दबदबे की नीति” खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया।

रूस और चीन लंबे समय से खुद को “मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर” यानी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थक के रूप में पेश करते रहे हैं। इसका अर्थ ऐसी दुनिया से है जहां शक्ति केवल एक देश तक सीमित न होकर कई बड़े देशों के बीच संतुलित हो।

पुतिन और जिनपिंग ने कहा कि रूस और चीन मिलकर अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित वैश्विक शासन व्यवस्था बनाने के लिए काम करेंगे।

मिडिल ईस्ट, BRICS और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा

दोनों नेताओं की बैठक में कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें मिडिल ईस्ट संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, BRICS सहयोग और वैश्विक आर्थिक हालात प्रमुख रहे।

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में रूस और चीन के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देश साझा रणनीतिक हितों पर साथ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी का उद्देश्य स्थिरता, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

चीन और रूस के बीच 40 समझौते संभव

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन इस दौरे में बड़े कारोबारी और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन पहुंचे हैं।

क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि दोनों देश लगभग 40 समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इनमें ऊर्जा, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और औद्योगिक सहयोग से जुड़े कई बड़े समझौते शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के लिए चीन सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन गया है।

यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़े रूस-चीन आर्थिक संबंध

यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने एशियाई देशों, खासकर चीन, के साथ अपने आर्थिक संबंध तेजी से बढ़ाए हैं।

चीन ने रूस से तेल, गैस और कोयले की खरीद बढ़ाई है, जबकि रूस चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और ऑटोमोबाइल जैसे उत्पाद आयात कर रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच व्यापार 228 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच गया।

हालांकि पश्चिमी देशों ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह आर्थिक रूप से रूस को समर्थन दे रहा है।

“पावर ऑफ साइबेरिया-2” पाइपलाइन पर भी नजर

बैठक में “पावर ऑफ साइबेरिया-2” गैस पाइपलाइन परियोजना पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

यह रूस और चीन के बीच प्रस्तावित विशाल ऊर्जा परियोजना है, जिसके तहत रूस से हर साल लगभग 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस चीन भेजी जाएगी।

यह पाइपलाइन मंगोलिया के रास्ते उत्तरी चीन तक पहुंचेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे दोनों देशों के ऊर्जा संबंध और मजबूत होंगे तथा रूस को यूरोपीय बाजारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

अमेरिका और पश्चिमी देशों को संदेश?

विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन और जिनपिंग की यह मुलाकात अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है।

हाल के वर्षों में चीन और रूस दोनों ने अमेरिका की वैश्विक नीतियों और सैन्य गठबंधनों की आलोचना की है। दोनों देश खुद को वैश्विक शक्ति संतुलन में वैकल्पिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस समय अमेरिका और रूस दोनों के साथ रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपना रहा है।

पुतिन और जिनपिंग की मजबूत राजनीतिक साझेदारी

राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग अब तक 40 से अधिक बार मुलाकात कर चुके हैं। दोनों नेताओं की दोस्ती को आधुनिक वैश्विक राजनीति की सबसे मजबूत रणनीतिक साझेदारियों में गिना जाता है।

2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद जिनपिंग ने अपनी पहली विदेश यात्रा रूस की थी। वहीं पुतिन भी कई मौकों पर चीन को अपनी शुरुआती विदेशी यात्राओं में प्राथमिकता देते रहे हैं।

दोनों नेता अक्सर सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे को “करीबी दोस्त” और “रणनीतिक साझेदार” बताते रहे हैं।

ईरान संकट और तेल कीमतों का असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ती अस्थिरता के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से रूस को अल्पकालिक आर्थिक लाभ मिल सकता है, क्योंकि रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादकों में शामिल है।

हालांकि पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस अब भी आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।

वैश्विक राजनीति में बढ़ती नई ध्रुवीयता

बीजिंग में हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तेजी से नए शक्ति संतुलन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

एक ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं, जबकि दूसरी ओर चीन और रूस जैसे देश वैश्विक राजनीति में वैकल्पिक नेतृत्व की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में रूस-चीन साझेदारी वैश्विक कूटनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

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