राजस्थान के उदयपुर में मंत्री Suresh Singh Rawat ने कांग्रेस नेता Govind Singh Dotasra पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “झूठ का ढोल” बताया। उन्होंने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने और विपक्ष की भूमिका सही तरीके से न निभाने का आरोप लगाया।
उदयपुर; राजस्थान के जल संसाधन विभाग मंत्री सुरेश रावत ने उदयपुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने और झूठी राजनीति करने का आरोप लगाया।
मंत्री रावत ने कहा कि विपक्ष को अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए, लेकिन वर्तमान में कुछ नेता तथ्यों को नजरअंदाज कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह से जनहित में काम कर रही है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में नहीं आती।
डोटासरा पर सीधा आरोप, विपक्ष की भूमिका पर सवाल
मंत्री सुरेश रावत ने अपने बयान में कहा कि गोविंद सिंह डोटासरा “झूठ का ढोल” हैं और बिना तथ्यों की पुष्टि किए लगातार बयानबाजी करते रहते हैं। उनके अनुसार, विपक्षी नेता दिनभर अलग-अलग लोगों की बातों को आधार बनाकर बयान देते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
रावत ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार को सुझाव देना और कमियों को उजागर करना होता है, लेकिन वर्तमान में कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दों पर बात करने के बजाय भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं भी पहले विपक्ष में रहे हैं, इसलिए उन्हें विपक्ष की भूमिका की पूरी समझ है। लेकिन मौजूदा विपक्ष अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से नहीं निभा रहा है।
सरकार के विकास कार्यों का दावा
मंत्री रावत ने भजनलाल सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि यह सरकार किसान, आम जनता और विकास के हित में कार्य कर रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी जा रही है और बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाएं लागू की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास कार्यों को गति देना और जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान करना है।
जल संसाधन क्षेत्र की बड़ी परियोजना पर जोर
सुरेश रावत ने उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में जल संसाधन से जुड़ी एक बड़ी परियोजना की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि जाखम बांध से जयसमंद झील, जयसमंद से बड़गांव डैम, बड़गांव से मातृकुंडिया डैम और आगे मेजा बांध तक पानी डायवर्जन की योजना लंबे समय से प्रस्तावित थी।

इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने बजट घोषणा के तहत लगभग साढ़े बारह करोड़ रुपये डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के लिए स्वीकृत किए हैं। मंत्री ने बताया कि परियोजना की कुल लागत लगभग 10,000 करोड़ रुपये आंकी गई है।
उन्होंने कहा कि डीपीआर लगभग पूरी हो चुकी है और इसे केंद्रीय जल आयोग (CWC) को मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। मंजूरी मिलते ही इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा।
इस परियोजना से न केवल सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी बल्कि पेयजल की समस्या का भी समाधान होगा।
सिंचाई परियोजनाओं पर करोड़ों की स्वीकृति
मंत्री ने बताया कि उदयपुर क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान सिंचाई विभाग के माध्यम से 678 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। वहीं वर्ष 2026-27 के लिए 275 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में कुल लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई परियोजनाएं क्षेत्र में चल रही हैं, जो कृषि उत्पादन और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
देवास परियोजना और अन्य विकास कार्य
सुरेश रावत ने बताया कि देवास थर्ड और देवास फोर्थ परियोजना पर भी काम चल रहा है। हालांकि कुछ स्थानों पर वन विभाग की अनुमति (NOC) लंबित है, जिसके कारण कुछ कार्यों में देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में वन संबंधी बाधाएं नहीं हैं, वहां कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। टनल निर्माण का काम शुरू हो चुका है और डैम निर्माण के लिए भी आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि जैसे ही सभी स्वीकृतियां प्राप्त हों, परियोजना को पूर्ण गति से आगे बढ़ाया जाए।
बागोलिया और खारी फीडर परियोजनाएं
मंत्री ने मावली क्षेत्र में बागोलिया फीडर परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लगभग 200 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 3700 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।
इसके अलावा खारी फीडर परियोजना राजसमंद में 121 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है, जो क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकास परियोजना मानी जा रही है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर टिप्पणी
अपने बयान के अंत में मंत्री रावत ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के कुछ राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत हो रही है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्य में भी राजनीतिक परिवर्तन की संभावना बन रही है, जबकि असम में भाजपा सरकार दोबारा मजबूत स्थिति में है।









