जंगल में बुद्धिमान हंस की कहानी, हंसों को शिकारी से बचाया

जंगल में बुद्धिमान हंस की कहानी, हंसों को शिकारी से बचाया

यह कहानी हमें 'एकता में बल' का महत्वपूर्ण संदेश देती है। यह सिखाती है कि कैसे समझदारी, दूरदर्शिता और मिल-जुलकर काम करने से हम बड़ी से बड़ी मुश्किलों का सामना कर सकते हैं और खतरों से बच सकते हैं। यह कहानी यह भी बताती है कि बड़ों की सलाह मानकर हम खुद को मुश्किलों से बचा सकते हैं।

कहानी 

एक बड़े और हरे-भरे जंगल में एक विशाल तालाब था। उस तालाब के किनारे पर एक बहुत पुराना और ऊँचा पेड़ था, जिस पर सैकड़ों हंसों का एक झुंड रहता था। इस झुंड में एक बहुत ही बूढ़ा और बुद्धिमान हंस भी था, जिसकी सलाह सभी हंस मानते थे।

एक दिन बुद्धिमान हंस ने पेड़ की जड़ में एक छोटी सी बेल उगते हुए देखी। उसने तुरंत सभी हंसों को इकट्ठा किया और कहा, 'देखो, यह जो बेल उग रही है, इसे अभी से उखाड़ देना चाहिए।' युवा हंसों ने बेल को ध्यान से देखा और बोले, 'पर क्यों, महाराज? यह तो इतनी छोटी और नाजुक है, इससे भला हमें क्या नुकसान होगा?'

बुद्धिमान हंस ने समझाया, 'अरे नादानों! यह बेल अभी छोटी है, लेकिन धीरे-धीरे यह बड़ी होती जाएगी और पेड़ के तने से लिपटकर ऊपर चढ़ती जाएगी। एक दिन यह इतनी मोटी और मज़बूत हो जाएगी कि कोई भी शिकारी इसका इस्तेमाल सीढ़ी की तरह करके हम तक पहुँच जाएगा और हमें पकड़ लेगा। अभी यह छोटी है, इसे आसानी से उखाड़ा जा सकता है।'

लेकिन युवा हंसों ने उसकी बात नहीं मानी। वे हँसने लगे और कहने लगे, 'आप बेवजह चिंता कर रहे हैं। जब ऐसा कुछ होगा, तब देख लेंगे। अभी इसे उखाड़ने की क्या ज़रूरत है?' बूढ़े हंस ने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन वे अपनी मस्ती में मग्न थे और उसकी सलाह को हल्के में ले लिया।

समय बीतता गया और बूढ़े हंस की बात सच साबित हुई। वह बेल धीरे-धीरे बड़ी होती गई और पेड़ के तने से लिपटकर ऊपर तक पहुँच गई। अब वह इतनी मज़बूत हो चुकी थी कि उसे तोड़ना या उखाड़ना किसी भी हंस के लिए नामुमकिन था।

एक दिन एक चालाक शिकारी जंगल में आया। उसने दूर से हंसों के झुंड को पेड़ पर बैठा देखा। वह शिकारी जानता था कि हंस बहुत ऊँचाई पर रहते हैं, लेकिन जब उसने पेड़ के तने से लिपटी हुई मज़बूत बेल देखी, तो उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने सोचा, 'यह बेल तो मेरे लिए सीढ़ी का काम करेगी।'

शाम होने पर जब सभी हंस दाना चुगकर वापस अपने घोंसलों में लौट रहे थे, तो शिकारी बेल के सहारे धीरे-धीरे पेड़ पर चढ़ गया और उसने एक बड़ा सा जाल बिछा दिया। रात हुई और सभी हंस गहरी नींद में सो गए। सुबह होते ही जैसे ही सभी हंस दाना चुगने के लिए नीचे उतरने लगे, वे शिकारी के जाल में फँस गए।

सभी हंस घबरा गए और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। वे पछताने लगे कि उन्होंने बुद्धिमान हंस की बात क्यों नहीं मानी। बुद्धिमान हंस भी जाल में फँसा हुआ था, लेकिन वह घबराया नहीं। उसने शांत रहते हुए सभी हंसों से कहा, 'घबराओ मत। मैं तुम्हें एक तरकीब बताता हूँ। जब शिकारी वापस आएगा, तो हम सब मरने का नाटक करेंगे। शिकारी सोचेगा कि हम सब मर चुके हैं और वह हमें एक-एक करके जाल से निकालकर नीचे फेंकेगा। जैसे ही वह हम सबको नीचे फेंक दे, मैं आवाज़ दूँगा और हम सब एक साथ उड़ जाएँगे।'

हंसों ने बुद्धिमान हंस की बात मानी। थोड़ी देर बाद शिकारी आया। उसने देखा कि सभी हंस जाल में मरे पड़े हैं। वह बहुत खुश हुआ। उसने एक-एक करके सभी हंसों को जाल से निकालकर नीचे फेंकना शुरू किया। जैसे ही आखिरी हंस नीचे गिरा, बुद्धिमान हंस ने ज़ोर से आवाज़ दी, 'उड़ो!' और सभी हंस एक साथ फुर्र से उड़ गए और शिकारी देखता रह गया।

सीख 

इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि 'एकता में ही बल है।' (Unity is strength). हमें हमेशा बड़ों की सलाह माननी चाहिए, क्योंकि वे अपने अनुभव से भविष्य के खतरों को भाँप सकते हैं। मुश्किल समय में घबराने के बजाय सूझबूझ और मिल-जुलकर काम करने से हर संकट का समाधान निकल जाता है।

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