हम अक्सर वैसा ही बन जाते हैं जैसा माहौल हमें मिलता है। कई बार हम अपनी अपार शक्ति को भूलकर खुद को कमजोर मान लेते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारे आसपास के लोग हमें यही बताते हैं या हम गलत संगत में होते हैं। यह कहानी एक ऐसे शेर की है जो भेड़ों के बीच पलकर खुद को भेड़ समझने लगा था। यह कहानी हमें अपनी सोई हुई अंतरात्मा को जगाने और अपनी 'असली पहचान' को जानने की प्रेरणा देती है।
कहानी
एक बार की बात है, एक घना जंगल था। किसी दुर्घटना में एक शेर का नवजात शावक (बच्चा) अपने परिवार से बिछड़ गया। वह अकेला और भूखा था। तभी वहां से भेड़ों का एक झुंड गुजरा। एक ममतामयी भेड़ को उस नन्हे शावक पर दया आ गई और उसने उसे अपने मेमनों के साथ ही पालने का फैसला किया।
शेर का वह बच्चा भेड़ों के बीच ही बड़ा होने लगा। संगत का असर उस पर गहरा पड़ा। वह उन्हीं की तरह 'में-में' करके मिमियाता था, उन्हीं की तरह घास खाता था और जंगल के छोटे-मोटे जानवरों की आवाजों से डर जाता था।
समय बीतता गया और वह शावक एक बड़ा और तगड़ा जवान शेर बन गया। उसका शरीर शेर का था, पंजे मजबूत थे और गर्दन पर घनी अयाल थी, लेकिन मानसिक रूप से वह खुद को एक डरपोक मेमना ही मानता था। उसे अपनी असली ताकत का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था। वह अपने विशाल शरीर के बावजूद भेड़ों के पीछे छिपकर चलता था।
एक दिन, भेड़ों का वह झुंड जंगल के किनारे घास चर रहा था। तभी अचानक, एक विशाल और खूंखार जंगली शेर ने झुंड पर हमला कर दिया। शेर की दहाड़ सुनकर सारी भेड़ें जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं। वह 'शेर-मेमना' भी डर के मारे कांपने लगा और हमेशा की तरह झाड़ियों में छिपने की कोशिश करने लगा।
हमलावर जंगली शेर की नजर उस झाड़ी में छिपे बड़े से शेर पर पड़ी जो भेड़ की तरह मिमिया रहा था और कांप रहा था। जंगली शेर हैरान रह गया। उसने अपनी जिंदगी में ऐसा अजीब नजारा कभी नहीं देखा था। वह अपना शिकार छोड़कर उस शेर-मेमने के पास गया और अपनी गगनभेदी आवाज में जोर से दहाड़ा।
शेर-मेमना डर के मारे जमीन पर लेट गया, आँखें बंद कर लीं और गिड़गिड़ाते हुए बोला, 'कृपया मुझे मत मारो! मैं तो एक गरीब और कमजोर मेमना हूँ। मुझे जाने दो।'
जंगली शेर को उस पर गुस्सा भी आया और तरस भी। उसने उसे झकझोरते हुए कहा, 'अरे मूर्ख! आँखें खोल। तू कोई मेमना नहीं है, तू जंगल का राजा शेर है। अपनी शक्ति को पहचान। तू क्यों इन भेड़ों की तरह डर रहा है?'
लेकिन वह शेर मानने को तैयार नहीं था, वह बस कांपता रहा।
जब जंगली शेर ने देखा कि बातों का कोई असर नहीं हो रहा है, तो उसने उसे गर्दन से पकड़ा और घसीटते हुए पास के एक साफ पानी वाले तालाब के किनारे ले गया। जंगली शेर ने कहा, 'पानी में झांककर देख! और बता कि तेरा चेहरा मेरे जैसा है या उन भागती हुई भेड़ों जैसा?'
शेर-मेमने ने डरते-डरते अपनी आँखें खोलीं और पानी में झांका। उसने पानी में अपना प्रतिबिंब देखा। फिर उसने बगल में खड़े जंगली शेर को देखा। वह यह देखकर दंग रह गया कि वह हूबहू उस शक्तिशाली जंगली शेर जैसा दिखता था। उसकी बड़ी अयाल, उसकी आँखें, उसका विशाल शरीर... सब कुछ एक जैसा था।
उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उसका पूरा शरीर एक अजीब सी ऊर्जा से भर गया। जंगली शेर ने फिर एक जोरदार दहाड़ लगाई और उसे ललकारा, 'अब मेरे साथ दहाड़! दिखा दे इस जंगल को कि तू कौन है!'
शेर-मेमने ने कोशिश की। पहले तो उसके गले से वही पुरानी 'में-में' की फंसी हुई आवाज निकली। लेकिन फिर उसने अपनी पूरी अंदरूनी ताकत बटोरी, अपने सीने में हवा भरी और एक जोरदार 'दहाड़' मारी।
वह दहाड़ इतनी तेज थी कि पूरा जंगल गूंज उठा। अपनी ही आवाज सुनकर वह खुद हैरान रह गया। उस एक पल में उसका सारा डर, सारी कमजोरी गायब हो गई। उसे अहसास हो गया कि वह कोई डरपोक मेमना नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली शेर है। उस दिन के बाद उसने घास खाना छोड़ दिया और जंगल के राजा की तरह जीने लगा।
सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि हम अक्सर अपने समाज, गलत संगत और माहौल के कारण खुद को कम आंकने लगते हैं। हम भूल जाते हैं कि हमारे भीतर अपार क्षमताएँ और शक्ति छिपी हुई है। दूसरों के बताए रास्ते पर चलने या भेड़चाल चलने के बजाय, हमें अपनी 'असली पहचान' और 'ताकत' को पहचानना चाहिए। जिस दिन आप अपनी सोई हुई शक्ति को जगा लेंगे, दुनिया की कोई भी चुनौती आपके सामने टिक नहीं पाएगी।













