नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति और लापरवाही के मामले में उत्तराखंड सरकार ने जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ अभियंताओं को निलंबित किया। NEET-UG फर्जी प्रमाणपत्र मामले में आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी निरस्त किए गए।
देहरादून: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में सरकार ने कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ अभियंताओं को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जन स्वास्थ्य से जुड़े मामले में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। इससे पहले NEET-UG 2026 काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्र से प्रवेश लेने के मामले में आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए गए।
ज्योलीकोट में दूषित पानी की सप्लाई पर कार्रवाई
नैनीताल जिले के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल की आपूर्ति के मामले में उत्तराखंड सरकार ने छह वरिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। जन स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों को जिम्मेदारी में लापरवाही का दोषी पाए जाने के बाद निलंबित किया गया है।

सरकार की ओर से की गई इस कार्रवाई को जन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। दूषित पेयजल की शिकायत के बाद मामले में कार्रवाई की गई।
भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की ओर से प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई का सिलसिला जारी है। सरकार ने भूमि खरीद में अनियमितताओं और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में भी कार्रवाई की है।
सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान के तहत अब तक लगभग 10 हजार एकड़ भूमि मुक्त कराए जाने की जानकारी दी गई है। सरकार का कहना है कि सुशासन और जन समस्याओं के त्वरित समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सीएम हेल्पलाइन 1905 की भी लगातार समीक्षा की जा रही है। इसके जरिए सामने आने वाली शिकायतों की निगरानी से संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने और समस्याओं के समाधान पर जोर दिया जा रहा है।
NEET-UG फर्जी प्रमाणपत्र मामले में आठ अभ्यर्थियों पर कार्रवाई
NEET-UG 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने के मामले में भी सरकार ने कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस मामले में अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं।
इन अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है। सरकार की ओर से फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लेने के मामलों में कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही, भ्रष्टाचार और जन समस्याओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया है। ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में छह वरिष्ठ अभियंताओं का निलंबन इसी कार्रवाई का हिस्सा है।











