जुलापुन अमोर्नविवाट बने फ्यू थाई पार्टी के नए अध्यक्ष, शिनावात्रा परिवार का प्रभाव बना चर्चा का विषय

थाईलैंड की फ्यू थाई पार्टी ने जुलापुन अमोर्नविवाट को नया नेता चुना। पेटोंगटार्न शिनावात्रा का इस्तीफा और शिनावात्रा परिवार का प्रभाव चर्चा में।

थाईलैंड की फ्यू थाई पार्टी ने जुलापुन अमोर्नविवाट को नया नेता चुना। पेटोंगटार्न शिनावात्रा के इस्तीफे के बाद यह बदलाव शिनावात्रा परिवार के राजनीतिक प्रभाव और पार्टी की आगामी रणनीति पर सवाल उठाता है।

World News: थाईलैंड की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। फ्यू थाई पार्टी ने जुलापुन अमोर्नविवाट को नया नेता चुन लिया है। यह कदम शिनावात्रा परिवार के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व पर सवाल उठाता है और संभावित रूप से थाईलैंड की राजनीति में नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

पेटोंगटार्न शिनावात्रा का इस्तीफा

फ्यू थाई पार्टी की पूर्व अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेटोंगटार्न शिनावात्रा को पिछले सप्ताह पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। अगस्त में एक अदालत ने उन्हें कंबोडिया के साथ सीमा विवाद से जुड़े नैतिक उल्लंघन के आरोप में प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा रणनीतिक था और पार्टी को आने वाली कानूनी चुनौतियों से बचाने के लिए दिया गया।

जुलापुन अमोर्नविवाट कौन हैं

50 वर्षीय जुलापुन अमोर्नविवाट उत्तरी चियांग माई प्रांत से सांसद हैं, जिसे फ्यू थाई का मजबूत गढ़ माना जाता है। उन्होंने पहले उप-प्रधानमंत्री और उप-वित्त मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। जुलापुन दिग्गज राजनेता सोमपोंग अमोर्नविवाट के पुत्र हैं, जिन्होंने 2019 में पार्टी का नेतृत्व किया और उप-प्रधानमंत्री का पद संभाला। जुलापुन को पार्टी के सदस्यों ने भारी बहुमत से नया नेता चुना।

पार्टी में जुलापुन की सक्रिय भूमिका

जुलापुन ने 2023 के चुनाव से पहले फ्यू थाई पार्टी की प्रमुख नीतियों को बढ़ावा दिया था, जिनमें लगभग 300 डॉलर का प्रोत्साहन वितरण और कैसिनो वैधीकरण जैसी योजनाएं शामिल थीं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रियता हासिल की है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि जुलापुन का नेतृत्व थाकसिन शिनावात्रा के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं होगा।

शिनावात्रा परिवार का प्रभाव

76 वर्षीय थाकसिन शिनावात्रा ने 1990 के दशक में फ्यू थाई पार्टी की स्थापना की थी। 2006 में सैन्य तख्तापलट के बाद वे निर्वासन में चले गए और वर्तमान में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं। शिनावात्रा परिवार पिछले दो दशकों से प्रो-सैन्य और प्रो-राजशाही अभिजात वर्ग का विरोध करता रहा है। उनके पॉपुलिस्ट नीतियों को सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता रहा है।

थाईलैंड की राजनीति में संभावित बदलाव

जुलापुन का नेतृत्व थाईलैंड की अस्थिर राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। सैन्य प्रभाव अभी भी देश की राजनीति में हावी है। फ्यू थाई की लोकप्रियता युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं पर निर्भर है, लेकिन कानूनी बाधाएं पार्टी की कार्यवाही और विस्तार में अड़चन डाल रही हैं। आगामी महीनों में यह स्पष्ट होगा कि जुलापुन शिनावात्रा परिवार के राजनीतिक छत्रछाया से बाहर निकलकर पार्टी को किस दिशा में ले जाते हैं।

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