Justice Yashwant Varma Case: जांच रिपोर्ट आज लोकसभा में होगी पेश, ‘कैश कांड’ पर बढ़ी हलचल

Justice Yashwant Varma Case: पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित कैश कांड की जांच रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश होगी। जानें मामले में अब तक क्या हुआ और आगे

पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिलने के मामले की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट आज, 12 अगस्त को लोकसभा में पेश की जाएगी।

नई दिल्ली: न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े कथित ‘कैश कांड’ की जांच रिपोर्ट आज, 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश की जाएगी। न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट मई 2026 में लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी। अब यह रिपोर्ट संसद के पटल पर रखे जाने के साथ ही मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

लोकसभा की बुधवार की कार्यसूची के अनुसार, सदन के महासचिव जांच समिति की दो खंडों में तैयार रिपोर्ट के साथ मौखिक साक्ष्य भी सदन के पटल पर रखेंगे। यह प्रक्रिया Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार की जा रही है। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का किस तरह मूल्यांकन किया।

कैसे सामने आया था ‘कैश कांड’?

मामला 14 मार्च 2025 की रात का है। उस दौरान न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को कथित तौर पर घर के एक स्टोर रूम में जली हुई करेंसी मिली थी। इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ कथित तौर पर बेहिसाब नकदी रखने के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

मामले ने न्यायपालिका की पारदर्शिता, न्यायाधीशों की जवाबदेही और न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता को लेकर भी व्यापक बहस छेड़ दी। विवाद बढ़ने के बाद न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया था।

तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति को न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर नकदी बरामद होने से जुड़े आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। समिति ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, साक्ष्यों और मौखिक बयानों की जांच के बाद मई 2026 में अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी। रिपोर्ट को अब संसद में पेश किया जा रहा है, जिससे इस पूरे मामले पर आगे की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

सांसदों ने शुरू की थी हटाने की प्रक्रिया

जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ संसद में उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद जांच समिति का गठन किया गया। हालांकि, इसी दौरान न्यायमूर्ति वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद न्यायाधीश को पद से हटाने की संसदीय प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो गई। इसके बावजूद जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें कथित नकदी मामले की जांच के निष्कर्ष दर्ज हैं।

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