जया एकादशी व्रत का पारण 30 जनवरी 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने पर पारण करना शुभ माना गया है। सही समय और विधि से पारण करने पर ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
Jaya Ekadashi Vrat Paran: माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को श्रद्धालुओं ने रखा, जिसका पारण शुक्रवार 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हरि वासर में पारण वर्जित है, इसलिए सुबह 7:10 से 9:20 बजे का समय सबसे शुभ माना गया है। सही मुहूर्त और विधि से पारण करने पर भगवान विष्णु की कृपा, सुख-समृद्धि और व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
जया एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा
पंचांग के अनुसार, जया एकादशी व्रत का पारण शुक्रवार 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा। शास्त्रों में नियम बताया गया है कि एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए। इसका विशेष कारण यह है कि द्वादशी तिथि का पहला भाग हरि वासर कहलाता है, जिसमें पारण करना वर्जित माना गया है।
इसलिए व्रतधारियों को केवल तिथि ही नहीं, बल्कि समय का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूरा फल नहीं मिलता, ऐसा धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है।
जया एकादशी पारण का शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक, 30 जनवरी को सूर्योदय सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर होगा। वहीं, एकादशी तिथि का समापन सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में जया एकादशी व्रत का पारण करने के लिए सुबह 7:10 से 9:20 बजे के बीच का समय सबसे शुभ माना गया है।
यह समय हरि वासर के बाद का है और द्वादशी तिथि के भीतर आता है, इसलिए इसे पारण के लिए उत्तम बताया गया है। यदि किसी कारणवश इस समय में पारण करना संभव न हो, तो शास्त्रों के अनुसार मध्याह्न काल बीत जाने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। जल्दबाजी में या निषिद्ध समय में पारण करने से बचना चाहिए।

एकादशी व्रत पारण से जुड़े जरूरी नियम
धार्मिक मान्यताओं में एकादशी व्रत के पारण को लेकर कुछ स्पष्ट नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है।
पहला नियम यह है कि एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए। सूर्योदय से पहले पारण करना वर्जित है, भले ही द्वादशी तिथि शुरू हो चुकी हो।
दूसरा नियम यह बताता है कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही पारण कर लेना शुभ होता है। यदि किसी कारणवश द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए, तब भी पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए।
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि द्वादशी तिथि के दौरान कभी भी पारण नहीं करना चाहिए, यानी तिथि निकल जाने के बाद व्रत खोलना उचित नहीं माना जाता। ऐसा करने से व्रत का संपूर्ण फल नहीं मिलता और साधक की तपस्या अधूरी मानी जाती है।
जया एकादशी व्रत पारण की विधि
व्रत पारण केवल भोजन करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक पूरी धार्मिक विधि बताई गई है। व्रत खोलने से पहले स्नान करना आवश्यक माना गया है। स्नान के बाद साफ और शुद्ध वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। विष्णु भगवान को पुष्प, तुलसी दल और दीप अर्पित करें। साथ ही घर के अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा कर दीप जलाएं। माना जाता है कि इस समय यदि पूजा में कोई भूल या कमी रह गई हो, तो भगवान से क्षमायाचना जरूर करनी चाहिए।
पूजा के बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देना शुभ माना गया है। दान के रूप में अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन दिया जा सकता है। इसके पश्चात ही व्रत खोलना चाहिए।
व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान को अर्पित किया गया भोग ग्रहण करें। इसके बाद सात्विक भोजन करें। कई लोग व्रत पारण के समय तुलसी जल या चरणामृत से व्रत खोलना भी शुभ मानते हैं।
जया एकादशी का धार्मिक महत्व
जया एकादशी का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यह व्रत विशेष रूप से मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के जाने-अनजाने किए गए पाप कर्मों का नाश होता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
क्यों जरूरी है सही समय पर पारण
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, एकादशी व्रत एक तपस्या की तरह होता है। इसमें नियम, संयम और श्रद्धा का विशेष महत्व है। यदि व्रत के दौरान नियमों का पालन किया गया, लेकिन पारण सही समय पर नहीं किया गया, तो व्रत अधूरा माना जाता है।
इसलिए व्रतधारियों को चाहिए कि वे पंचांग देखकर सही मुहूर्त में ही पारण करें। इससे न केवल धार्मिक फल की प्राप्ति होती है, बल्कि मन को भी संतोष मिलता है कि व्रत विधिपूर्वक संपन्न हुआ है।
जया एकादशी व्रत रखने वाले भक्तों के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। सही समय, विधि और नियमों के साथ पारण कर श्रद्धालु भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।











