जयपुर के जवाहर नगर में पुलिस ने BSNL की भूमिगत केबल से कॉपर वायर चोरी करने वाले संगठित गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का कॉपर, खुदाई के उपकरण और बाइक बरामद की है। गिरोह रात में वारदात करता था।
जयपुर: राजस्थान लो राजधानी में पुलिस ने बीएसएनएल की भूमिगत केबलों से कॉपर वायर चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लंबे समय से शहर के अलग-अलग इलाकों में दूरसंचार विभाग की केबलों को निशाना बना रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किया गया कॉपर वायर, खुदाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और एक मोटरसाइकिल भी बरामद की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देते थे। दिन में इलाके की रेकी की जाती थी और रात के अंधेरे में जमीन खोदकर भूमिगत केबलों से तांबे के तार निकाल लिए जाते थे। इस घटना ने एक बार फिर देशभर में बढ़ती कॉपर चोरी की घटनाओं और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर रची जाती थी साजिश
मामले की जानकारी देते हुए Ranjita Sharma ने बताया कि गिरोह का सरगना नूर आलम उर्फ गुड्डु पहले भूमिगत पाइपलाइन और केबल बिछाने के कार्य से जुड़ा रहा है। इसी अनुभव के कारण उसे शहर में जमीन के नीचे बिछी दूरसंचार केबलों की सटीक जानकारी थी।
पुलिस के मुताबिक, नूर आलम ने इस तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल चोरी की योजना बनाने में किया। उसने भूमिगत मशीनों के संचालन में माहिर आरिफ इस्लाम उर्फ राजा को अपने साथ जोड़ा। बाद में आरिफ ने अपने भाई राहुल इस्लाम के जरिए पश्चिम बंगाल से मजदूर बुलाए, जिनकी मदद से चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जाने लगा।
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने अलग-अलग भूमिकाओं के साथ पूरी टीम तैयार की हुई थी, ताकि चोरी के दौरान किसी को शक न हो।
दिन में रेकी, रात में चोरी
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले दिन के समय उन इलाकों की रेकी करते थे जहां बीएसएनएल की भूमिगत केबलें मौजूद थीं। इसके बाद रात में फावड़े, कुदाली और अन्य औजारों की मदद से सड़क किनारे या खाली स्थानों पर खुदाई कर केबल निकाली जाती थी।
केबल निकालने के बाद आरोपी उसे छोटे-छोटे हिस्सों में काटते और सुनसान जगहों पर जलाते थे। प्लास्टिक की बाहरी परत जल जाने के बाद अंदर का कॉपर वायर अलग कर लिया जाता था। बाद में यह कॉपर स्थानीय कबाड़ियों को बेच दिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि तांबे की बढ़ती कीमतों के कारण हाल के महीनों में इस तरह की चोरी की घटनाओं में तेजी देखी गई है।
लोगों को गुमराह करने के लिए अपनाते थे नया तरीका
गिरोह के सदस्य चोरी के दौरान यदि किसी स्थानीय व्यक्ति या राहगीर द्वारा पूछताछ की जाती, तो वे खुद को दूरसंचार कंपनी का कर्मचारी बताते थे। आरोपी दावा करते थे कि वे बीएसएनएल की ओर से फाइबर केबल बिछाने का कार्य कर रहे हैं।
इस बहाने से वे लोगों का शक दूर कर देते और बिना किसी बाधा के काम जारी रखते थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इसी चालाकी की वजह से गिरोह काफी समय तक पकड़े बिना सक्रिय रहा।
BSNL सेवाओं पर पड़ा असर
BSNL की भूमिगत केबलों को नुकसान पहुंचने से कई इलाकों में दूरसंचार सेवाएं प्रभावित हुईं। इंटरनेट और फोन सेवाओं में बाधा आने के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक दूरसंचार नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी घटनाएं न केवल आर्थिक हानि पहुंचाती हैं, बल्कि आपातकालीन संचार सेवाओं पर भी असर डाल सकती हैं।
![]()
पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गतिविधियों के कारण बीएसएनएल को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें नूर आलम उर्फ गुड्डु (40), आरिफ इस्लाम उर्फ राजा (26), राहुल इस्लाम (27), प्रशांत मंडल (29), अनवर हुसैन (34), साहिल हुसैन (25), माजिद हुसैन (36) और शाहरुख (22) शामिल हैं।
आरोपियों के खिलाफ चोरी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
कबाड़ी नेटवर्क की भी जांच
पुलिस अब उन कबाड़ियों की पहचान करने में जुटी है जो चोरी का कॉपर खरीदते थे। अधिकारियों का मानना है कि बिना खरीदारों के समर्थन के इस तरह का अवैध कारोबार लंबे समय तक नहीं चल सकता।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह गिरोह अन्य शहरों में भी इसी तरह की वारदातों में शामिल रहा है। इसके अलावा पुलिस चोरी के माल की सप्लाई चेन और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
बढ़ती कॉपर चोरी बनी चुनौती
भारत सहित कई देशों में हाल के वर्षों में कॉपर वायर चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। तांबे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण अपराधी सार्वजनिक बिजली, दूरसंचार और रेलवे नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूमिगत केबल नेटवर्क की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली, सेंसर आधारित अलर्ट और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता है। साथ ही स्क्रैप मेटल खरीदने वाले कारोबारियों पर भी सख्त निगरानी जरूरी है।
फिलहाल जयपुर पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।









