कैपिटल हिंसा मामले में ट्रंप का राष्ट्रपति सुरक्षा दावा खारिज, कानूनी कार्रवाई की राह आसान

जज अमित मेहता ने कैपिटल हिंसा मामले में ट्रंप का राष्ट्रपति संरक्षण खारिज किया। अब ट्रंप पर मुकदमे और जांच की प्रक्रिया आसान हो गई है।

अमेरिकी जिला अदालत ने ट्रंप का राष्ट्रपति संरक्षण दावा खारिज कर दिया। जज अमित मेहता ने कहा कि 6 जनवरी 2021 का भाषण और जॉर्जिया के सचिव को फोन कॉल राष्ट्रपति के आधिकारिक कर्तव्यों में शामिल नहीं थे।

America: अमेरिका की राजनीति और न्याय व्यवस्था में जारी विवाद में डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी जिला अदालत के भारतीय मूल के जज अमित मेहता ने कैपिटल हिल हिंसा से जुड़े मामले में ट्रंप के लिए राष्ट्रपति संरक्षण (Presidential Immunity) की दलील को खारिज कर दिया है। जज मेहता ने स्पष्ट किया कि 6 जनवरी 2021 को ट्रंप द्वारा दिया गया भाषण राष्ट्रपति के आधिकारिक कर्तव्यों (Official Duties) के अंतर्गत नहीं आता। इसका मतलब है कि ट्रंप इस मामले में अपने पद के आधार पर सुरक्षा और संरक्षण का लाभ नहीं ले सकते।

जज मेहता का फैसला 

जज मेहता ने अपने आदेश में कहा कि ट्रंप का भाषण राजनीतिक प्रकृति का था और यह सीधे तौर पर चुनाव के परिणाम बदलने की कोशिश से जुड़ा था। इसके अलावा, जॉर्जिया के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ब्रैड राफेनस्पर्जर को ट्रंप का फोन भी एक उम्मीदवार के रूप में था, न कि राष्ट्रपति के आधिकारिक कर्तव्यों के तहत। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस भाषण और फोन कॉल को राष्ट्रपति संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

इस फैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह 6 जनवरी 2021 की उस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है, जब अमेरिकी कैपिटल बिल्डिंग पर हिंसा हुई थी। इस हमले ने अमेरिकी लोकतंत्र और संवैधानिक प्रक्रियाओं को गहराई से प्रभावित किया। अब ट्रंप पर कानूनी जांच और मुकदमे की राह आसान हो गई है, क्योंकि उन्हें अपने पूर्व राष्ट्रपति पद के आधार पर संरक्षण का दावा करने का अधिकार नहीं है।

कानूनी दृष्टिकोण

जज मेहता ने यह भी माना कि ट्रंप की कुछ कार्रवाइयों में आधिकारिक तत्व (Official Acts) हो सकते हैं। ऐसे मामलों में ट्रंप भविष्य में राष्ट्रपति संरक्षण का दावा दोबारा कर सकते हैं। लेकिन इस खास भाषण और फोन कॉल को सीधे तौर पर आधिकारिक कर्तव्यों के अंतर्गत नहीं माना गया। अदालत ने कहा कि राजनीतिक और व्यक्तिगत निर्णयों के लिए राष्ट्रपति संरक्षण का दायरा लागू नहीं होता।

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