असम की राजनीति में Kamakhya Temple का विशेष महत्व माना जाता है। चुनाव प्रचार से लेकर शपथ ग्रहण तक कई बड़े नेता मां कामाख्या के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
Kamakhya Temple: गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि असम की राजनीतिक संस्कृति का भी अहम हिस्सा माना जाता है। चुनावी दौर हो या मुख्यमंत्री पद की शपथ, कई बड़े नेता मां कामाख्या का आशीर्वाद लेने जरूर पहुंचते हैं। यही वजह है कि यह शक्तिपीठ राजनीति और आध्यात्मिक परंपरा दोनों में खास स्थान रखता है।
असम की राजनीति में क्यों खास है कामाख्या मंदिर
असम की राजनीति में मां कामाख्या मंदिर का प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है। राज्य में चुनावी माहौल शुरू होते ही नेताओं की आवाजाही इस शक्तिपीठ में बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले भी कई नेता यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

हाल ही में असम में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा ने भी शपथ ग्रहण से पहले मां कामाख्या का आशीर्वाद लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का आशीर्वाद राज्य की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
शपथ ग्रहण से पहले पहुंचे कई बड़े नेता
असम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से पहले भाजपा और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता कामाख्या मंदिर पहुंचे। इनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत जैसे नाम शामिल रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मां कामाख्या के दर्शन करना अब केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि असम की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। कई नेता इसे शुभ शुरुआत और जनसमर्थन से भी जोड़कर देखते हैं।
51 शक्तिपीठों में शामिल है कामाख्या मंदिर
गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर को हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां देवी सती का योनिभाग गिरा था। इसी वजह से मां कामाख्या को शक्ति, सृजन और स्त्री ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि साल में एक बार देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस दौरान तीन दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और दर्शन नहीं होते।
तंत्र साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र
कामाख्या मंदिर को तंत्र साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां देशभर से साधक, श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। खासकर अंबुबाची मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
असम में चुनाव के दौरान भी यहां राजनीतिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कई नेता सार्वजनिक रूप से मां कामाख्या का आशीर्वाद लेकर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करते हैं।
आस्था और राजनीति का अनोखा मेल
विशेषज्ञों के अनुसार कामाख्या मंदिर असम की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। यही कारण है कि राजनीति और धार्मिक आस्था का एक अनोखा मेल यहां देखने को मिलता है।
चुनाव प्रचार, सरकार गठन और शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मौकों पर नेताओं का यहां पहुंचना अब एक परंपरा जैसा बन चुका है।








