अंबुबाची मेले के समापन के बाद गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए फिर खोल दिया गया। तीन दिन तक विशेष धार्मिक परंपराओं के कारण मंदिर बंद रहा। अब लाखों भक्त दर्शन, पूजा और पवित्र अंगोदक-अंगवस्त्र प्राप्त करने पहुंच रहे हैं।
गगुवाहाटी: असम की राजधानी गुवाहाटी स्थित विश्व प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर तीन दिनों तक बंद रहने के बाद शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिया गया। वार्षिक अंबुबाची मेले के समापन के साथ ही मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना फिर से शुरू हो गई है। मंदिर खुलते ही देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ने लगी।
अंबुबाची मेला पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है और यह शक्ति उपासना तथा तांत्रिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, तांत्रिक साधक और पर्यटक इस अवसर पर कामाख्या धाम पहुंचते हैं। इस वर्ष भी प्रशासन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की हैं।
क्यों तीन दिन तक बंद रहता है कामाख्या मंदिर?
अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून की रात 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ हुई थी। परंपरा के अनुसार इसी समय से देवी कामाख्या के वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) काल की शुरुआत मानी जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इन तीन दिनों के दौरान देवी विश्राम करती हैं। इसलिए मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और नियमित पूजा-अर्चना भी स्थगित रहती है।
इस अवधि में किसी भी श्रद्धालु को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। तीन दिन की इस धार्मिक परंपरा के पूरा होने के बाद विशेष पूजा और नित्य पूजन संपन्न किया जाता है। इसके पश्चात मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए जाते हैं।
नित्य पूजा के बाद शुरू हुए दर्शन
शुक्रवार सुबह पारंपरिक नित्य पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की अनुमति दे दी। मंदिर खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए।
प्रशासन के अनुसार पूरे दिन लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल, स्वयंसेवकों और मंदिर कर्मचारियों की तैनाती की गई है।श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर, पेयजल, विश्राम स्थल, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
क्या है अंबुबाची मेले का धार्मिक महत्व?
अंबुबाची मेला शक्ति उपासना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है। इस पर्व का संबंध धरती की उर्वरता, सृजन शक्ति और प्रकृति के जीवन चक्र से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं, जो स्त्री शक्ति, मातृत्व और सृजन क्षमता का प्रतीक है।
इसलिए इस पर्व को केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि प्रकृति और नारी शक्ति के सम्मान का उत्सव भी माना जाता है। अंबुबाची मेला यह संदेश देता है कि जीवन का सृजन प्रकृति और स्त्री शक्ति से जुड़ा है, इसलिए दोनों का सम्मान भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
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शक्ति पीठों में विशेष स्थान रखता है कामाख्या मंदिर
गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के 51 प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। यह मंदिर देवी शक्ति की उपासना का अत्यंत पवित्र केंद्र माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सती के शरीर के विभिन्न अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्ति पीठों की स्थापना हुई। कामाख्या मंदिर को उन प्रमुख शक्ति पीठों में विशेष स्थान प्राप्त है और यह विशेष रूप से तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि यहां हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश तथा अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधक पहुंचते हैं।
अंगोदक और अंगवस्त्र का विशेष महत्व
मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं को 'अंगोदक' और 'अंगवस्त्र' प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। अंगोदक उस पवित्र जल को कहा जाता है जो मंदिर परिसर से धार्मिक परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं को दिया जाता है। वहीं अंगवस्त्र एक विशेष लाल वस्त्र होता है, जिसे देवी की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इन दोनों पवित्र प्रसादों को घर में रखने से सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां
अंबुबाची मेले के दौरान हर वर्ष गुवाहाटी में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी राज्य सरकार, जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने व्यापक तैयारियां की हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और हवाई अड्डे पर अतिरिक्त सहायता केंद्र बनाए गए हैं। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है।
इसके अलावा स्वच्छता, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, मोबाइल शौचालय और सूचना केंद्रों की भी व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
गुवाहाटी में बढ़ी धार्मिक और पर्यटन गतिविधियां
अंबुबाची मेले के कारण गुवाहाटी में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। होटल, धर्मशालाएं, परिवहन सेवाएं, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प विक्रेता और छोटे व्यापारियों के लिए यह आयोजन आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और शक्ति उपासना को समझने के लिए इस मेले में शामिल होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंबुबाची मेला असम के धार्मिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र
कामाख्या मंदिर केवल सामान्य श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि तांत्रिक परंपरा के अनुयायियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। अंबुबाची मेले के दौरान देशभर से तांत्रिक साधक, अघोरी, नागा साधु और विभिन्न संप्रदायों के संत यहां विशेष साधना और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान पूरा नीलाचल पर्वत आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यही विशेषता इस मेले को भारत के अन्य धार्मिक आयोजनों से अलग पहचान देती है।









