कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि जरूरी, संसद में केंद्र सरकार ने बताई परियोजना की स्थिति

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि जरूरी है। राज्य सरकार से जमीन मिलने के बाद ही परियोजना आगे बढ़सकेगी।

राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश के हवाई संपर्क पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। भूमि उपलब्ध होने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

शिमला: हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क को मजबूत बनाने का मुद्दा राज्यसभा में उठा, जहां केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना की मौजूदा स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने विस्तार की योजना तैयार कर ली है, लेकिन इसके लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, जो अभी राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है।

कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध कराना जरूरी

भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने संसद में हिमाचल प्रदेश के हवाई संपर्क, एयरपोर्ट विस्तार और हेलीपोर्ट विकास से जुड़े मुद्दे उठाए। इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने राज्य सरकार के अनुरोध पर कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार की विस्तृत योजना तैयार कर ली है। इस परियोजना को लागू करने के लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि की जरूरत होगी। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति-2016 के अनुसार एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराना संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। फिलहाल यह भूमि एयरपोर्ट अथॉरिटी को हस्तांतरित नहीं की गई है, इसलिए परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी है।

कुल्लू-भुंतर और शिमला एयरपोर्ट विस्तार में भौगोलिक चुनौतियां

केंद्रीय मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों के विस्तार में प्राकृतिक और भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कुल्लू-भुंतर एयरपोर्ट और शिमला एयरपोर्ट के रनवे विस्तार में कठिन पहाड़ी भू-भाग, सीमित उपलब्ध भूमि और अन्य तकनीकी बाधाओं के कारण परियोजनाओं को आगे बढ़ाना फिलहाल आसान नहीं है।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान समय में इन दोनों एयरपोर्टों के विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। हालांकि केंद्र सरकार राज्य में हवाई संपर्क को बेहतर बनाने के लिए अन्य विकल्पों और योजनाओं पर भी काम कर रही है।

हवाई संपर्क मजबूत करने पर सरकार का जोर

राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश में आधारभूत ढांचे और हवाई संपर्क के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक भूमि जल्द उपलब्ध कराए, ताकि परियोजना समय पर शुरू हो सके और पर्यटन, व्यापार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को इसका लाभ मिल सके।

केंद्रीय मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि वर्तमान में शिमला एयरपोर्ट से दिल्ली और धर्मशाला के लिए उड़ान सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं कांगड़ा (गगल) एयरपोर्ट दिल्ली, जेवर, चंडीगढ़ और शिमला से जुड़ा हुआ है। कुल्लू-भुंतर एयरपोर्ट से अमृतसर, दिल्ली और जयपुर के लिए नियमित हवाई सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

सरकार का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र और संबंधित एजेंसियां लगातार प्रयासरत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना पूरी होने के बाद प्रदेश के पर्यटन, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए आवश्यक भूमि का समय पर उपलब्ध होना सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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