कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विपक्षी राज्यों को दी नसीहत, कहा- 'मैं सत्ताधारी पार्टी से असहमत हो सकता हूं, लेकिन...'

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विपक्षी राज्यों को दी नसीहत, कहा- 'मैं सत्ताधारी पार्टी से असहमत हो सकता हूं, लेकिन...'

कांग्रेस सांसद शशि थरूर हाल के दिनों में अपनी ही पार्टी के निशाने पर रहे हैं। जब भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उनकी सरकार के किसी काम की सराहना की, तो पार्टी के अंदर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विपक्ष शासित राज्यों को साफ संदेश दिया है कि राजनीतिक वैचारिक शुद्धता के पीछे भागने से काम नहीं चलता और विकास के लिए केंद्र के साथ सहयोग करना आवश्यक है। थरूर ने कहा कि सत्ताधारी दल को देश का जनादेश मिला है और राज्यों की जनता की भलाई के लिए उन्हें योजनाओं और फंड का लाभ लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।

वैचारिक अड़ियलपन से विकास पर असर

दुबई में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में अमृता न्यूज के मंच से थरूर ने कहा, लोग केवल वैचारिक शुद्धता में रुचि रखते हैं। इस तरह से आप काम नहीं करवा सकते। अगर आपका राज्य केंद्र के साथ सहयोग नहीं करता है तो आप जनता के लिए योजनाओं को लागू कैसे करेंगे?" उन्होंने इसे राजनीति में अड़ियलपन और निरंकुशता बताया और चेतावनी दी कि इस तरह के रवैये से विकास प्रभावित होता है।

थरूर ने X (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपने विचार साझा किए और लिखा, यदि केंद्र की योजना आपके राज्य के लिए फंड लेकर आती है, तो उसे ठुकराना करदाताओं के पैसे के अपव्यय के समान है। यह पागलपन है। यह पैसा हमारे देश और हमारे लोगों का है।

जनादेश का सम्मान

थरूर ने स्पष्ट किया कि वे अक्सर बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से असहमत होते हैं, लेकिन इसे राजनीतिक व्यवहारिकता के नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं सत्ताधारी पार्टी से असहमत हो सकता हूं, लेकिन उन्हें देश से जनादेश मिला है। मैं उनके साथ काम करूंगा। यदि केंद्र किसी योजना के लिए शर्तें रखता है, तो मैं देखूंगा कि इसे अपने विश्वास के अनुसार कैसे लागू किया जाए, लेकिन पैसे लेना सुनिश्चित करूंगा क्योंकि मेरी जनता को इसकी आवश्यकता है।

उन्होंने हाल ही में केरल की एक घटना का उदाहरण दिया, जहां राज्य सरकार ने कथित रूप से केंद्र की योजना को खारिज कर दिया था। थरूर ने कहा, "केरल ने फंड लौटाया और कहा कि राजनीतिक रूप से शुद्ध रहेंगे। लेकिन स्कूल की छतें टपक रही हैं और बच्चों के लिए डेस्क या ब्लैकबोर्ड तक नहीं हैं। यह पागलपन है। करदाताओं का पैसा है और इसे इस तरह नहीं ठुकराना चाहिए।"

राजनीतिक व्यवहारिकता और वैचारिक संतुलन

थरूर ने दुबई में कहा कि राजनीति में वैचारिक अड़ियलपन की जगह आपसी सहयोग और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा, "मैं सत्ताधारी दल के साथ हमेशा सहमत नहीं हो सकता, लेकिन यदि कोई योजना हमारे राज्य के लिए फंड लेकर आती है, तो उसे लेने में कोई हर्ज नहीं है। यह जनता के हित में है।

उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में वर्तमान में राजनीतिक माहौल संवेदनशील है। हाल ही में रामनाथ गोयनका लेक्चर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की सराहना करने के कारण थरूर अपने ही कांग्रेस साथियों के निशाने पर आ चुके हैं। उन्होंने कहा, "मैंने केवल तथ्य और परिस्थिति के आधार पर बात की, कोई तारीफ नहीं की। लेकिन इस समय हमारे देश में न्यूट्रल पोस्ट को भी आलोचना या सराहना के रूप में देखा जा रहा है।

 

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