कानपुर में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खाकी वर्दी पहनकर लोगों को पुलिसकर्मी होने का भरोसा दिलाता था और इसके बाद लूट व टप्पेबाजी की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है। चौबेपुर पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपित दो नई बाइकों से किसी नई वारदात की फिराक में घूम रहे थे। उनके कब्जे से 35 हजार रुपये की नकदी और दो बाइक बरामद की गई हैं। पुलिस जांच में आरोपितों के खिलाफ कई जिलों में लूट और टप्पेबाजी के मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह केवल कानपुर शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के कई जिलों में सक्रिय होकर अलग-अलग तरीके से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपित कथित तौर पर हाईवे और प्रमुख सड़कों के आसपास खाकी वर्दी का इस्तेमाल करते थे। पुलिस की पहचान और वर्दी का रौब दिखाकर लोगों को अपने साथ वाहन में बैठाने या रोकने के बाद उनके सामान और नकदी पर हाथ साफ करने का आरोप है।
चौबेपुर थाना पुलिस रात में गश्त कर रही थी। इसी दौरान देंदूपुर अंडरपास के नीचे दो नई बाइकों पर चार युवक संदिग्ध परिस्थितियों में बैठे दिखाई दिए। पुलिस टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो आरोपितों ने कथित तौर पर मौके से भागने का प्रयास किया। पुलिस ने घेराबंदी कर चारों को पकड़ लिया। पूछताछ और तलाशी के दौरान उनके पास से 35 हजार रुपये नकद बरामद हुए। पुलिस के अनुसार दोनों बाइक भी नई थीं और उन पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी, जिससे पुलिस का शक और गहरा हुआ।
गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान फर्रुखाबाद के कमालगंज थाना क्षेत्र के महरूपुर रावी निवासी कुलदीप, अजीत और गौरव तथा कन्नौज के गुरसहायगंज थाना क्षेत्र के खाड़ेदेवा निवासी अक्षय कुमार के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि चारों के आपराधिक इतिहास की जांच की गई तो अलग-अलग जिलों में इनके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज मिले।
पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने कथित तौर पर बताया कि वे खाकी वर्दी पहनकर लोगों पर पुलिसकर्मी होने का प्रभाव डालते थे। इसके बाद कार या बाइक में लोगों को बैठाकर उनकी जेब काटने और लूटपाट करने की घटनाएं करते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह का तरीका यह था कि पहले ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाया जाए जिसे आसानी से भ्रमित किया जा सके और फिर पुलिस की वर्दी तथा रौब का इस्तेमाल करके उसे अपने नियंत्रण में लिया जाए।
चौबेपुर थाना प्रभारी के अनुसार चारों आरोपितों ने मेरठ, लखनऊ और फर्रुखाबाद सहित कई स्थानों पर वारदातें करने की बात बताई है। पुलिस के मुताबिक कुलदीप के खिलाफ अलग-अलग जिलों में 13 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि अजीत के खिलाफ 11 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब आरोपितों के आपराधिक इतिहास को दूसरे जिलों से भी सत्यापित कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने किन-किन स्थानों पर घटनाएं की थीं और उनमें इनकी भूमिका क्या रही।
पूछताछ में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार बीते दिनों शिवराजपुर क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप से जुड़े कर्मचारी को भी इस गिरोह ने कथित तौर पर निशाना बनाया था। आरोपितों ने पता पूछने के बहाने कर्मचारी को कार में बैठाया और फिर उसकी जेब से नकदी निकालने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद पीड़ित को कुछ दूर ले जाकर धक्का देकर नीचे उतार दिया गया था। इस मामले में भी पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार नौ सितंबर की दोपहर शिवराजपुर के इंदलपुर निवासी मोनू सविता के साथ यह घटना हुई थी। आरोपितों ने कथित तौर पर उनसे रास्ते का पता पूछा और फिर उन्हें कार में बैठा लिया। इसके बाद चौबेपुर के पास उनकी जेब से नकदी निकाल ली गई। पुलिस के अनुसार बाद में उन्हें वाहन से उतार दिया गया। इस घटना के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपितों के बयान का मिलान किया जा रहा है।
इसके अलावा 17 सितंबर की शाम कल्याणपुर क्षेत्र में भी एक महिला के साथ चेन लूट की घटना में इन आरोपितों की भूमिका सामने आने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस के अनुसार महिला निरंकारी भवन में सत्संग से लौट रही थीं। इसी दौरान आरोपितों ने कथित तौर पर उनके गले से सोने की चेन लूट ली। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के CCTV कैमरों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की थी।
गिरोह पर हरबंश मोहाल क्षेत्र में भी लूट की घटना में शामिल होने का आरोप है। पुलिस के अनुसार अगले दिन हमीरपुर के एक व्यापारी की करीब 50 हजार रुपये की नकदी पार करने की घटना में भी गिरफ्तार आरोपितों की भूमिका सामने आई है। इन घटनाओं के सामने आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने इसी तरीके से और कितने लोगों को निशाना बनाया।
खाकी वर्दी का इस्तेमाल इस गिरोह के कथित अपराध करने के तरीके का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया जा रहा है। सामान्य तौर पर पुलिस की वर्दी देखकर लोग जांच या पूछताछ को लेकर अधिक विरोध नहीं करते। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर गिरोह लोगों को अपने साथ वाहन में बैठाता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपितों ने वर्दी कहां से हासिल की और क्या उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी इस काम में शामिल था।
गिरोह के कई जिलों में सक्रिय होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस के सामने अब केवल गिरफ्तार आरोपितों से जुड़े मामलों की जांच ही नहीं, बल्कि उनके संपर्कों और संभावित सहयोगियों की पहचान करने की चुनौती भी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन आरोपितों के साथ और कौन लोग काम करते थे और वारदात के बाद लूटी गई रकम या सामान का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था।
गिरफ्तारी के दौरान बरामद दो नई बाइक भी जांच का हिस्सा हैं। पुलिस इनके स्वामित्व, खरीद और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। दोनों बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होने की बात पुलिस ने कही है। ऐसे में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन वाहनों का इस्तेमाल पहले की किसी घटना में किया गया था या इन्हें किसी अन्य उद्देश्य से खरीदा गया था।
पुलिस ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ कई जनपदों में मुकदमे दर्ज हैं। इनमें लूट और टप्पेबाजी से जुड़े मामले शामिल हैं। आपराधिक इतिहास की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस संबंधित जिलों की पुलिस से भी संपर्क कर रही है। इससे पुराने मामलों में आरोपितों की भूमिका की पुष्टि करने और लंबित घटनाओं की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
कानपुर में खाकी वर्दी पहनकर अपराध करने का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपितों ने कथित तौर पर पुलिस की पहचान और वर्दी का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया। आम लोगों के लिए ऐसी स्थिति में यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि सामने वाला वास्तविक पुलिसकर्मी है या पुलिस की वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस की ओर से पहचान पत्र और आधिकारिक प्रक्रिया की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है, खासकर तब जब कोई व्यक्ति अचानक रोककर नकदी, दस्तावेज या वाहन में बैठने के लिए दबाव बनाए।
चौबेपुर पुलिस की गश्त के दौरान हुई गिरफ्तारी से फिलहाल गिरोह की कई घटनाओं की कड़ियां जुड़ने का दावा किया जा रहा है। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार आरोपितों ने कितनी वारदातें की थीं और किन मामलों में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। आरोपितों के बयानों को भी पुलिस अन्य साक्ष्यों से मिलाकर देख रही है।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था। यदि कई जिलों में दर्ज मामलों में समान तरीका सामने आता है तो उन घटनाओं को भी इस गिरोह से जोड़कर देखा जा सकता है। पुलिस के लिए CCTV फुटेज, पीड़ितों के बयान, बरामद नकदी, बाइक और आरोपितों का आपराधिक रिकॉर्ड इस जांच में महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
फिलहाल चारों आरोपित पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे पूछताछ के आधार पर अन्य घटनाओं की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्यों पर अलग-अलग जिलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं। कुलदीप और अजीत के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या भी पुलिस ने बताई है। अब दूसरे जिलों की पुलिस से जानकारी जुटाकर उनके पूरे आपराधिक नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
कानपुर के चौबेपुर में हुई इस कार्रवाई से पुलिस को कई लूट और टप्पेबाजी की घटनाओं की जांच आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दो नई बाइक, 35 हजार रुपये नकद और गिरफ्तार चार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस का कहना है कि गिरोह कानपुर के अलावा मेरठ, लखनऊ और फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में सक्रिय था। अब जांच के दौरान यह सामने आना बाकी है कि इस गिरोह से जुड़े और कितने मामले तथा लोग सामने आते हैं।










