KGMU मजार विवाद: 6 फरवरी तक देना होगा नोटिस का जवाब, इसके बाद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू

KGMU मजार विवाद में प्रशासन ने 6 फरवरी तक नोटिस का जवाब देने का समय दिया है। जवाब नहीं मिलने पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। जानें पूरे मामले की

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू में मजारों को लेकर विवाद और राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। प्रशासन ने कैंपस में बनी छह मजारों को अवैध बताते हुए उन पर नोटिस चस्पा किया है और जवाब देने की आखिरी तारीख 6 फरवरी तय की है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में बनी मजारों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। KGMU प्रशासन ने परिसर में मौजूद कथित अवैध मजारों को लेकर नोटिस जारी किया है और जवाब देने की अंतिम तारीख 6 फरवरी 2026 तय की है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि इस तारीख तक मजार कमेटी संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करती है, तो इसके बाद ध्वस्तीकरण (demolition) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और धार्मिक रूप भी ले चुका है, जिससे लखनऊ में माहौल गरमाया हुआ है।

15 दिन का समय दिया गया था — अब आखिरी मौका

KGMU प्रशासन ने पहले ही 6 कथित अवैध मजारों पर नोटिस चस्पा करते हुए मजार कमेटी को 15 दिनों का समय दिया था। यह समय सीमा 6 फरवरी को समाप्त हो रही है। प्रशासन का कहना है कि यदि मजार कमेटी यह साबित करना चाहती है कि ये मजारें KGMU के निर्माण से पहले की हैं, तो उन्हें ठोस प्रमाण और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। 

अन्यथा, विश्वविद्यालय परिसर को नियमों के अनुसार साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। KGMU प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक भावना के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध कब्जे और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ है।

KGMU कैंपस में कुल 8 मजारें — 6 पर नोटिस

विश्वविद्यालय परिसर में कुल 8 मजारें मौजूद हैं, लेकिन प्रशासन ने इनमें से 6 मजारों को अवैध बताते हुए नोटिस जारी किया है। प्रशासन के मुताबिक, नोटिस जारी करने से पहले यह मामला अदालत में भी ले जाया गया था। कोर्ट से उनके पक्ष में फैसला आने के बाद ही यह कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद ही नोटिस चस्पा किए गए और अब ध्वस्तीकरण की तैयारी की जा रही है। KGMU प्रशासन का कहना है कि:

  • विश्वविद्यालय की जमीन पर अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं है।
  • परिसर का उपयोग शिक्षा, शोध और चिकित्सा सेवाओं के लिए होना चाहिए।
  • किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण बिना कानूनी अनुमति के अवैध माना जाएगा।

हालांकि, मजार कमेटी का दावा है कि ये मजारें दशकों पुरानी हैं और विश्वविद्यालय बनने से पहले की हैं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। विभिन्न दलों के नेता KGMU कैंपस का दौरा कर रहे हैं और इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने KGMU जाकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा और इसे “धार्मिक भावनाओं के खिलाफ कार्रवाई” बताया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह मामला पूरी तरह कानूनी और प्रशासनिक है, इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मामला सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक संगठनों के नेता भी सामने आ गए हैं। मौलाना फिरंगी मेहंदी ने दावा किया है कि KGMU परिसर में मौजूद मजारें विश्वविद्यालय बनने से पहले की हैं और इन्हें हटाना गलत होगा। वहीं, महाराज विष्णु दास ने कहा है कि यदि मजारें वास्तव में इतनी पुरानी हैं, तो इसके पुख्ता प्रमाण KGMU प्रशासन को दिए जाने चाहिए। केवल दावों के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता।

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