बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन से राजनीति में एक युग समाप्त हो गया। उनकी प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना ने श्रद्धांजलि देते हुए उनके लोकतांत्रिक योगदान को याद किया और परिवार के प्रति संवेदना जताई।
Dhaka: बांग्लादेश की राजनीति में दशकों तक सत्ता, संघर्ष और टकराव की प्रतीक रहीं खालिदा जिया के निधन ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। इस खबर ने सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति को भी गहरे तौर पर प्रभावित किया है। सबसे अहम बात यह रही कि उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खुलकर दुख जताया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। लंबे समय तक चली कटु राइवलरी (rivalry) के बाद आया यह बयान अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
शेख हसीना का भावुक संदेश
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खालिदा जिया के निधन को बांग्लादेश की राजनीति के लिए “गहरा नुकसान” बताया। यह संदेश आवामी लीग के आधिकारिक X अकाउंट के जरिए साझा किया गया। अपने बयान में हसीना ने व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर खालिदा जिया के राजनीतिक योगदान को स्वीकार किया और उन्हें देश के इतिहास की अहम नेता बताया।
हसीना ने कहा कि खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और लोकतंत्र (democracy) की स्थापना व मजबूती में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने लिखा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में खालिदा जिया का योगदान उल्लेखनीय रहा है और आने वाली पीढ़ियां उन्हें इसी भूमिका के लिए याद रखेंगी।
पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पहचान
खालिदा जिया का नाम बांग्लादेश की राजनीति में एक मजबूत पहचान के तौर पर दर्ज है। वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और एक ऐसे दौर में सत्ता संभाली, जब लोकतंत्र कई चुनौतियों से जूझ रहा था। शेख हसीना ने अपने संदेश में यह भी माना कि खालिदा जिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
परिवार के प्रति संवेदनाएं

शेख हसीना ने खालिदा जिया के परिवार के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने खास तौर पर बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान का नाम लेते हुए कहा कि इस कठिन समय में वह उनके परिवार के लिए दुआ करती हैं। हसीना ने ईश्वर से प्रार्थना की कि खालिदा जिया की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को यह दुख सहने की ताकत मिले।
दो बेगम की दशकों लंबी राइवलरी
खालिदा जिया और शेख हसीना की प्रतिद्वंद्विता बांग्लादेश की राजनीति का सबसे चर्चित अध्याय रही है। दोनों नेताओं ने तीन दशक से अधिक समय तक देश की राजनीति को दिशा दी। कभी सत्ता में, तो कभी विपक्ष में रहते हुए उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ कड़ा राजनीतिक संघर्ष किया।
बांग्लादेश में इन्हें आमतौर पर “दो बेगम” कहा जाता था। विदेशी मीडिया ने भी इस टकराव को “Battle of the Begums” नाम दिया। दोनों मिलकर देश के 54 साल के इतिहास में 30 साल से ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहीं। यह अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड माना जाता है।
राजनीति से आगे बढ़ता संदेश
खालिदा जिया के निधन के बाद शेख हसीना का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि राजनीति से ऊपर भी कुछ मूल्य होते हैं। लंबे समय तक चली दुश्मनी के बावजूद एक नेता द्वारा दूसरे नेता के योगदान को स्वीकार करना लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए अहम माना जा रहा है।
सजीब वाजेद जॉय की प्रतिक्रिया
शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने भी खालिदा जिया के निधन पर दुख जताया। अमेरिका में रहने वाले जॉय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि खालिदा जिया ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उपलब्धियां हासिल कीं और देश के लिए महत्वपूर्ण नीतियां बनाईं।
जॉय ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनका योगदान याद किया जाएगा और इस समय उनका जाना बांग्लादेश के लिए एक बड़ा झटका है। जॉय पहले हसीना सरकार में आईसीटी (ICT) मामलों के सलाहकार रह चुके हैं और उनकी प्रतिक्रिया को भी राजनीतिक हलकों में गंभीरता से लिया गया।












