खरमास हिंदू पंचांग का एक विशेष समय माना जाता है, जब सूर्य के धनु या मीन राशि में प्रवेश करने पर मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और नया व्यवसाय शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है, जबकि पूजा-पाठ, दान और साधना को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
Kharmas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य देव के धनु या मीन राशि में प्रवेश करने पर खरमास की अवधि शुरू होती है, जिसे धार्मिक दृष्टि से मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों को टालने की परंपरा रही है। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक इस समय ग्रहों की स्थिति शुभ मुहूर्त बनाने के लिए अनुकूल नहीं होती, इसलिए लोग बड़े निर्णयों और मांगलिक आयोजनों को खरमास समाप्त होने के बाद ही करना पसंद करते हैं। हालांकि पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
खरमास क्या होता है और क्यों लगता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों, यानी धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है। इस दौरान सूर्य की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि शुभ मुहूर्त बनना कठिन हो जाता है। इसी कारण से इस अवधि में नए और बड़े मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा चली आ रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की इस स्थिति में ग्रहों का प्रभाव संतुलित नहीं रहता, जिसके कारण शुभ कार्यों से अपेक्षित परिणाम मिलने की संभावना कम मानी जाती है। यही वजह है कि प्राचीन काल से ही विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों को खरमास समाप्त होने के बाद ही करने की सलाह दी जाती है।
खरमास में किन कामों से दूरी रखना जरूरी
धार्मिक परंपराओं के अनुसार खरमास के दौरान कई मांगलिक और शुभ कार्यों को स्थगित किया जाता है। माना जाता है कि इस समय किए गए बड़े फैसलों या नए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिलते।
इसी कारण इस अवधि में विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते। इसके अलावा नए घर का निर्माण शुरू करना, गृह प्रवेश करना, नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना और मुंडन या नामकरण जैसे संस्कार भी टाल दिए जाते हैं। कई लोग बड़े पारिवारिक समारोह और धार्मिक आयोजन भी खरमास खत्म होने के बाद ही करते हैं।

पूजा, दान और साधना के लिए क्यों खास है यह समय
खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल न माना जाता हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र समय माना गया है। इस दौरान पूजा-पाठ, व्रत, जप-तप और धार्मिक साधना करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है।
धर्मग्रंथों के अनुसार इस समय जरूरतमंद लोगों को दान देना, मंदिरों में सेवा करना और आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। कई श्रद्धालु इस अवधि में गीता पाठ, रामायण पाठ या अन्य धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन भी करते हैं। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
खरमास के दौरान क्या करना माना जाता है शुभ
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान व्यक्ति को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देना चाहिए। सुबह-शाम भगवान की पूजा करना, सूर्य देव को जल अर्पित करना और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना इस समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान देना भी पुण्यदायी माना जाता है। कई लोग इस समय तीर्थ यात्रा, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते हैं।








