कल से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू, 10 बड़े विधेयक होंगे पेश

संसद का शीतकालीन सत्र 1 से 19 दिसंबर तक चलेगा। सरकार परमाणु ऊर्जा, शिक्षा ढांचा और कॉरपोरेट कानून जैसे 10 अहम विधेयक पेश करेगी, जबकि विपक्ष प्रदूषण।

संसद का शीतकालीन सत्र 1 से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें सरकार 10 प्रमुख विधेयक पेश करने वाली है। विपक्ष SIR और बढ़ते वायु प्रदूषण पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। सत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

Parliament Winter Session: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है और विपक्ष सरकार को SIR तथा वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी में है। सत्र के दौरान 15 बैठकें होंगी और इसमें देश से जुड़े प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

सरकार का विधायी एजेंडा

सरकार इस शीतकालीन सत्र में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इसमें सिविल न्यूक्लियर सेक्टर (Civil Nuclear Sector) को निजी कंपनियों के लिए खोलने का विधेयक मुख्य माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि इस क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़े ताकि ऊर्जा क्षमता को मजबूत किया जा सके और देश को तकनीकी रूप से और सक्षम बनाया जा सके। इसके साथ ही उच्च शिक्षा ढांचा (Higher Education Framework), कॉरपोरेट और शेयर बाजार विनियमन, तथा मध्यस्थता कानून (Arbitration Law) में सुधार जैसे बिल भी सत्र की सूची में शामिल हैं।

सरकार इस सत्र को अपने सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रही है। खासकर ऊर्जा और शिक्षा क्षेत्र में नीति-निर्माण को लेकर सरकार की योजना है कि जो विधेयक पेश किए जाएँ, वे देश के विकास मॉडल को और मजबूत करें।

विपक्ष की तैयारी

विपक्ष इस सत्र में SIR तथा वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सरकार को कड़े सवालों से घेरने वाला है। राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण को विपक्ष एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा मान रहा है। साथ ही विपक्ष देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR से जुड़े फैसलों को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि इन निर्णयों से आम जनता पर सीधा असर पड़ रहा है और कई राज्यों में प्रशासनिक परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण बन गई हैं।

सर्वदलीय बैठक में हुई चर्चा

सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में आगामी सत्र के विधायी कार्यक्रम और चर्चाओं के प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यसभा में सदन के नेता और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल उपस्थित रहे।

विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी और कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, द्रमुक के तिरुचित शिवा समेत कई अन्य पार्टियों के नेता बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में सभी दलों ने अपनी प्राथमिकताओं और मुद्दों को सामने रखा ताकि सत्र के दौरान व्यापक और संतुलित चर्चा हो सके।

विपक्ष का आरोप 

सर्वदलीय बैठक से पहले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष सत्र के दौरान निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच कथित मिलीभगत से जुड़े मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगा। उन्होंने इसे सिर्फ वोट चोरी ही नहीं बल्कि ‘वोट डकैती’ कहा। तिवारी ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने वाले ऐसे प्रयासों को संसद में प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। विपक्ष सत्र के दौरान चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े सवालों को गंभीरता से उठाने वाला है।

दस प्रमुख विधेयक होंगे पेश

शीतकालीन सत्र में कुल 10 प्रमुख विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025, भारतीय उच्च शिक्षा आयोग से जुड़ा बिल, राष्ट्रीय राजमार्ग संशोधन बिल, कॉर्पोरेट कानून संशोधन, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025, और मध्यस्थता कानून (Arbitration Law) में संशोधन शामिल हैं। ये विधेयक देश के प्रशासनिक, शैक्षिक और आर्थिक ढांचे को बेहतर बनाने से जुड़े हैं। सत्र का मुख्य फोकस सुधार और पारदर्शिता को मजबूत करने पर रहेगा।

शीतकालीन सत्र से अपेक्षाएँ

इस वर्ष का शीतकालीन सत्र कई मायनों में अहम है क्योंकि सरकार और विपक्ष दोनों ही सत्र में बड़ी राजनीतिक लड़ाई की तैयारी में हैं। जहां सरकार अपनी नीतिगत उपलब्धियों और सुधारों को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार को मजबूती से चुनौती देने की योजना बना चुका है।

आगामी दिनों में संसद के भीतर होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि कौन से विधेयक बिना बाधा के पारित होंगे और किन मामलों पर व्यापक बहस देखने को मिलेगी।

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