करूर भगदड़ जांच तेज, दिल्ली में CBI मुख्यालय पहुंचे थलापति विजय

करूर भगदड़ जांच तेज, दिल्ली में CBI मुख्यालय पहुंचे थलापति विजय

करूर भगदड़ मामले में CBI ने अभिनेता-नेता थलापति विजय से दिल्ली में पूछताछ शुरू की है। 27 सितंबर 2025 की TVK रैली में भगदड़ मचने से 41 लोगों की मौत हो गई थी।

Karur Stampede: तमिलनाडु के करूर जिले में हुई दर्दनाक भगदड़ एक बार फिर सुर्खियों में है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय से इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने पूछताछ शुरू की है। यह पूछताछ दिल्ली में की जा रही है, जहां विजय अपनी पार्टी तमिलगा वेत्त्री कज़गम TVK की रैली के आयोजन को लेकर एजेंसी के सामने पेश हुए। 27 सितंबर 2025 को हुई इस रैली में भगदड़ मचने से 41 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद से यह मामला लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।

दिल्ली में CBI के सामने पेश हुए थलापति विजय

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में CBI मुख्यालय पहुंचने के बाद थलापति विजय से कई घंटों तक पूछताछ की जा रही है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि रैली के दौरान सुरक्षा और crowd management में कहां चूक हुई। CBI का मानना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि आयोजन से जुड़ी गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। इसी कड़ी में विजय की भूमिका, निर्णय और मौके पर मौजूदगी को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।

रैली के दौरान क्या हुआ था

27 सितंबर 2025 को करूर में TVK की विशाल जनसभा आयोजित की गई थी। इस रैली में विजय के भाषण को सुनने के लिए हजारों लोग जुटे थे। जैसे ही विजय खुले वाहन में मंच की ओर बढ़े, भीड़ बेकाबू हो गई। आगे बढ़ने और नजदीक पहुंचने की होड़ में भगदड़ मच गई। गर्मी, अव्यवस्था और भीड़ के दबाव के कारण कई लोग बेहोश होने लगे। कुछ ही देर में हालात इतने बिगड़ गए कि 41 लोगों की जान चली गई।

CBI के तीखे सवाल

CBI की पूछताछ में विजय से सीधे और कड़े सवाल पूछे गए। एजेंसी का पहला सवाल यह था कि जब वह खुले वाहन पर खड़े थे और भीड़ में लोग बेहोश होते साफ दिख रहे थे, तब भी उन्होंने भाषण क्यों जारी रखा। CBI ने यह जानना चाहा कि क्या उन्हें हालात की गंभीरता का अंदाजा नहीं था या फिर इसे नजरअंदाज किया गया।

दूसरा सवाल इस बात पर केंद्रित था कि मंच से पानी की बोतलें भीड़ की ओर फेंकी जाती दिखीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि समस्या समझ में आ चुकी थी। इसके बावजूद सभा को तुरंत रोकने या भीड़ को नियंत्रित करने के निर्देश क्यों नहीं दिए गए।

तीसरा और सबसे गंभीर सवाल विजय के कार्यक्रम में देरी को लेकर था। CBI ने पूछा कि वह समय पर कार्यक्रम स्थल पर क्यों नहीं पहुंचे। एजेंसी का तर्क है कि देरी के कारण भीड़ लंबे समय तक इंतजार करती रही, जिससे बेचैनी और दबाव बढ़ा। CBI ने यह भी पूछा कि क्या यह देरी राजनीतिक ताकत दिखाने का तरीका थी।

आयोजन और प्रबंधन पर जांच का फोकस

CBI की जांच सिर्फ मंच पर हुए घटनाक्रम तक सीमित नहीं है। एजेंसी रैली की planning से लेकर execution तक हर पहलू की जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि रैली से पहले पार्टी नेताओं और आयोजकों के बीच कितनी बैठकें हुईं और उनमें क्या फैसले लिए गए।

CBI यह भी पता लगा रही है कि पुलिस और पार्टी के बीच सुरक्षा और crowd control को लेकर जो समझौता हुआ था, उसका पालन क्यों नहीं हो पाया। क्या पर्याप्त बैरिकेडिंग थी। क्या एंट्री और एग्जिट पॉइंट सही तरीके से बनाए गए थे। क्या मौके पर मेडिकल टीम और एंबुलेंस की संख्या पर्याप्त थी।

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