करूर भगदड़ मामले में विरोधाभासी आदेशों पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, मद्रास हाई कोर्ट रजिस्ट्रार को भेजा नोटिस

करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट की लिस्टिंग प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। दो अलग-अलग आदेशों से नाराज़ सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार

करूर भगदड़ मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट की लिस्टिंग प्रणाली पर सवाल उठाए। दो अलग-अलग बेंचों के विरोधाभासी आदेशों से नाराज़ कोर्ट ने रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया और स्पष्ट स्पष्टीकरण मांगा। राज्य सरकार ने सीबीआई जांच पर रोक हटाने की मांग की।

New Delhi: करूर भगदड़ मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मद्रास हाई कोर्ट के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हाई कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग और सुनवाई के तरीके में “कुछ गड़बड़” दिखाई दे रही है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। 

कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को इस मामले में पक्षकार भी बना दिया है। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उनके सामने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई।

SC की पहली प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी टीवीके (TVK) की याचिका पर हुई सुनवाई को लेकर अपनी नाराज़गी जताई थी। याचिका का उद्देश्य केवल रोड शो को लेकर दिशानिर्देश तय करना था, लेकिन चेन्नई बेंच ने सीधे विशेष जांच दल (SIT) जांच का आदेश दे दिया। यह फैसला मदुरै बेंच के पहले के आदेश से उलट था, जिसमें सीबीआई जांच से इनकार किया गया था। दो अलग-अलग आदेशों ने सुप्रीम कोर्ट को चिंतित कर दिया और उसने मद्रास हाई कोर्ट से पूरी प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह के विरोधाभासी आदेशों से न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं और यह स्पष्टता मांगते हैं कि एक ही तरह के मामलों में आखिर अलग-अलग आदेश क्यों दिए गए।

करूर भगदड़ मामला

यह पूरा विवाद 27 सितंबर को टीवीके की रैली में हुई उस भयावह भगदड़ से जुड़ा है जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार पर व्यवस्था में गंभीर चूक के आरोप लगे। इसी घटना के आधार पर टीवीके ने याचिका दायर की थी कि बड़े कार्यक्रमों और रोड शो के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं।

तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील एनके कौल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल कर दी है और चाहती है कि अदालत उसकी दलीलों को सुने। सरकार ने यह भी आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई सीबीआई जांच पर रोक हटाई जाए और एक-सदस्यीय जांच आयोग यानी न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी जाए।

SC की प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की दलीलों पर तुरंत फैसला देने से इनकार करते हुए कहा कि वह पहले यह समझना चाहता है कि मद्रास हाई कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग, स्थानांतरण और सुनवाई की प्रक्रिया कैसे काम कर रही है। कोर्ट की राय है कि घटनाओं की जांच बाद में भी की जा सकती है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों की जांच तुरंत आवश्यक है।

बेंच ने कहा कि जब एक याचिका का विषय केवल प्रशासनिक दिशानिर्देश थे, तो SIT जैसी भारी जांच का आदेश क्यों दिया गया, और वह भी ऐसे समय जब उसी मामले पर दूसरी बेंच ने अलग राय व्यक्त की थी। इस प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर असमानता दिखती है, जिसे स्पष्ट करना जरूरी है।

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