कुणाल घोष की कार पर बेलेघाटा में कथित हमला, बाइक सवारों पर घेरकर तोड़फोड़ का आरोप

TMC विधायक कुणाल घोष ने बेलेघाटा मे बाइक सवारों पर कार घेरकर तोड़फोड़ का आरोप लगाया। उन्होने BJP पर भी निशाना साधा, जबकि भाजपा विधायक ने संलिप्तता से इनकार किया

TMC विधायक कुणाल घोष ने बेलेघाटा में उनकी कार पर कथित हमले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बाइक सवारों ने कार को घेरकर हथौड़े से शीशे तोड़ने की कोशिश की। भाजपा विधायक सजल घोष ने घटना की निंदा की, लेकिन BJP की भूमिका से इनकार किया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक कुणाल घोष की कार पर कथित हमले का मामला सामने आया है। यह घटना उनकी कार पर उत्तरपाड़ा में हुए हमले के एक दिन बाद बेलेघाटा इलाके में सामने आई। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बाइक सवारों के एक समूह ने उनकी कार का पीछा किया, उसे घेर लिया और हथौड़े से शीशे तोड़ने की कोशिश की। कुणाल घोष ने इस घटना के लिए भाजपा से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अपनी सुरक्षा के लिए वह अपने सहयोगी और चालक के साथ नारकेलडांगा थाने पहुंचे। दूसरी ओर, भाजपा विधायक सजल घोष ने घटना की निंदा की, लेकिन कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भाजपा इस घटना में शामिल है।

बेलेघाटा में क्या हुआ?

TV9 बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, कुणाल घोष ने एक ऑडियो संदेश के जरिए आरोप लगाया कि बेलेघाटा में एक कार्यक्रम में जाते समय उनकी कार का पीछा किया गया। उनके मुताबिक, बाइक सवारों के एक समूह ने उनकी कार को घेर लिया और वाहन में तोड़फोड़ की।

कुणाल घोष ने दावा किया कि हमलावरों के पास हथियार थे और उन्होंने हथौड़े से कार के शीशे तोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि स्थिति को देखते हुए वह अपने चालक और सहयोगी के साथ नारकेलडांगा थाने पहुंचे। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने बेलेघाटा से उनका पीछा किया और उन्हें निशाना बनाया। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच और स्वतंत्र पुष्टि का विवरण अभी सामने नहीं आया है।

भाजपा पर लगाया आरोप, विधायक ने किया इनकार

बेलेघाटा की घटना के बाद कुणाल घोष ने भाजपा पर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि हमले के पीछे भाजपा से जुड़े लोग थे।

हालांकि, भाजपा विधायक सजल घोष ने घटना की निंदा की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लेकिन उन्होंने भाजपा की संलिप्तता से इनकार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें विश्वास नहीं है कि घटना के समय कुणाल घोष घटनास्थल पर मौजूद थे।

इस तरह घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस ने हमले के लिए किसी व्यक्ति या संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

एक दिन पहले उत्तरपाड़ा में भी हुआ था हमला

बेलेघाटा की घटना से एक दिन पहले, 26 सितंबर को कुणाल घोष की कार पर उत्तरपाड़ा में कथित हमला हुआ था। उस समय वह हुगली जिले के श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की सभा में शामिल होने जा रहे थे।

रिपोर्टों के मुताबिक, काले झंडे लेकर कुछ लोगों ने उनकी कार को घेर लिया और ‘गो बैक’ के नारे लगाए। इसके बाद कार पर अंडे और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगा। कुणाल घोष ने कहा था कि कार के शीशे टूट गए और वह आगे नहीं जा सके।

कुणाल घोष ने उस घटना के बाद आरोप लगाया था कि मौके पर पुलिस मौजूद नहीं थी। उन्होंने इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया और शिकायत दर्ज कराने के लिए कोलकाता लौटने की बात कही थी।

उत्तरपाड़ा हमले पर भी आमने-सामने आए TMC और BJP

उत्तरपाड़ा की घटना के बाद TMC और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। TMC नेताओं ने हमले के पीछे भाजपा की भूमिका होने का आरोप लगाया था।

वहीं, उत्तरपाड़ा के भाजपा विधायक दीपांजन चक्रवर्ती ने इसे जनता की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बताया था। पुलिस ने उस समय भी हमले के लिए किसी पक्ष की जिम्मेदारी तय नहीं की थी।

इस घटना के वीडियो में कुछ लोगों को कुणाल घोष की कार को घेरते और वाहन पर अंडे-पत्थर फेंकते देखा गया था। कार का पिछला शीशा टूट गया था। घटना के बाद कुणाल घोष को कोलकाता लौटना पड़ा था।

कुणाल घोष ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

उत्तरपाड़ा में हुए हमले के बाद कुणाल घोष ने पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी कार को रोका गया और उस पर हमला किया गया, लेकिन घटनास्थल पर पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे।

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं को रैली में पहुंचने से रोका जा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों के जवाब में भाजपा की ओर से अलग दावे किए गए और पुलिस ने किसी राजनीतिक संगठन को हमले के लिए आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया था।

जून में भी कुणाल घोष पर अंडे फेंके जाने का दावा

कुणाल घोष पर इससे पहले जून में भी अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह घटना ममता बनर्जी के आवास के बाहर हुई थी।

रिपोर्टों में कहा गया था कि चंदन नाम के एक स्थानीय युवक ने अंडे फेंकने की जिम्मेदारी ली थी। उसने मीडिया से बातचीत में अपने कृत्य को सही ठहराने की कोशिश की थी और कुणाल घोष पर लोगों के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार करने के आरोप लगाए थे। उस घटना को लेकर भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

लगातार घटनाओं से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

कुणाल घोष की कार पर लगातार दो दिनों में कथित हमलों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

पहले उत्तरपाड़ा में उनकी कार को घेरकर अंडे और पत्थर फेंके जाने का मामला सामने आया और अगले दिन बेलेघाटा में बाइक सवारों द्वारा कथित तौर पर कार का पीछा करने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगा।

दोनों घटनाओं में कुणाल घोष ने हमलावरों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, दोनों मामलों में जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस जांच महत्वपूर्ण होगी।

बेलेघाटा की घटना में जांच अहम

बेलेघाटा की ताजा घटना में यह स्पष्ट करना बाकी है कि कार पर वास्तव में किसने हमला किया, हमलावरों की संख्या कितनी थी और क्या घटना के पीछे कोई राजनीतिक संगठन था। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वाहन को हुए नुकसान की जांच से घटनाक्रम स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

कुणाल घोष के अनुसार, उन्होंने जान बचाने के लिए नारकेलडांगा थाने में शरण ली। दूसरी ओर, भाजपा विधायक सजल घोष ने हमले की निंदा करते हुए भाजपा की भूमिका से इनकार किया है।

कानून-व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियों के बीच नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर बहस को जन्म देती हैं। किसी राजनीतिक दल की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकती है।

फिलहाल कुणाल घोष की ओर से बेलेघाटा में उनकी कार पर कथित हमले का आरोप लगाया गया है। पुलिस की ओर से घटना के आरोपियों की पहचान और हमले के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। उत्तरपाड़ा की घटना में भी पुलिस ने तत्काल किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया था। ऐसे में बेलेघाटा मामले में भी जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है।

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