टीवी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली कविता कौशिक अपने किरदारों को लेकर उतनी ही सजग हैं, जितनी करियर की शुरुआत में थीं।धारावाहिक एफ.आई.आर में चंद्रमुखी चौटाला जैसी यादगार भूमिका निभाने के बाद, वह अब स्टीरियोटाइप छवि से बाहर निकलकर कुछ नया करना चाहती हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: टीवी की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली अभिनेत्री कविता कौशिक अब अपने प्रसिद्ध किरदार चंद्रमुखी चौटाला की छवि को तोड़कर नए और चुनौतीपूर्ण रोल्स करने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। उनका मानना है कि 30-35 साल की महिलाओं के लिए टीवी में रोचक और मजबूत किरदारों की कमी है, और अक्सर उन्हें केवल सास या पारंपरिक बहू के रोल मिलते हैं।
चंद्रमुखी चौटाला से बाहर निकलने की चाह
कविता कौशिक ने कहा, “एफ.आई.आर में चंद्रमुखी चौटाला जैसी यादगार भूमिका निभाने के बाद भी मुझे लगता है कि इस छवि में बंधकर रहना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मुझे ऐसा रोल करना है, जो मेरी पर्सनैलिटी और अभिनय क्षमता को सही मायने में दिखाए।” उन्होंने आगे कहा कि कई बार उन्हें टीवी में 20 साल से पुलिस या सख्त किरदार ऑफर होते रहे हैं, लेकिन किसी कारणवश उन्हें मना करना पड़ता था।
कविता का कहना है कि नए किरदार उनके लिए केवल कैरियर का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह उनकी पहचान बनाने का अवसर भी हैं। “मुझे घुटन होती है जब मुझे लगता है कि मैं स्टीरियोटाइप की तरह चंद्रमुखी चौटाला तक ही सीमित रह जाऊंगी। इसलिए मैंने इस बार चुनौतीपूर्ण रोल चुना,” उन्होंने बताया।
कप्तान में नया रोल
अभिनेत्री ने अमेज़न एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज कप्तान में पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है। यह किरदार उनके लिए बिल्कुल नया और चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा, “मैंने इस शो के लिए हां इसलिए कहा क्योंकि मुझे ऐसा रोल चाहिए था, जैसा फिल्मों में विलेन को निभाते हैं। ये मौका मुझे टीवी में पहले कभी नहीं मिला।
कविता बताती हैं कि उनके पति ने भी उन्हें इस रोल के लिए प्रेरित किया। “शुरुआत में लगा कि शायद ना कह दूं, लेकिन जब रोल के बारे में बताया गया, तो मुझे लगा कि इसे करना ही है, भले ही पैसे कम मिलें।
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टीवी ने दिया सब कुछ
कविता कौशिक ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान से की थी और उन्होंने बताया कि टीवी ने उन्हें जो सम्मान, ख्याति और दर्शक प्यार मिला, वह अद्वितीय है। “मुझे सब कुछ टीवी ने दिया है। इतनी ख्याति, इतना प्यार, ऐसे दर्शक जिन्होंने आज तक मुझे इतना पसंद किया। मैं टीवी पर काम करना चाहती हूं, लेकिन अब 30-35 साल की महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण रोल बहुत कम हैं।”
वह आगे हंसते हुए कहती हैं, कई बार सीधे सास बना देते हैं, बहू की जिंदगी में जहर डालने वाला रोल। इन किरदारों में लोग मुझे गंभीरता से नहीं लेंगे। इसलिए अब मैं नई भूमिकाओं की तलाश में हूं।
चुनौतीपूर्ण रोल और स्टीरियोटाइप से बाहर
कविता ने यह भी बताया कि उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों में काम किया है, लेकिन चंद्रमुखी चौटाला का प्रभाव उनके बाकी कामों पर भी पड़ता है। “जब मैं बाहर जाती हूं, लोग मुझे चंद्रमुखी चौटाला कहकर ही बुलाते हैं। यह खुशी की बात है, लेकिन मेरी छवि को तोड़ना जरूरी था ताकि मैं स्टीरियोटाइप से बाहर निकल सकूं।
अभिनेत्री ने कहा कि सख्त रोल निभाने का अवसर मिलने पर दिल टूटना भी आम बात है। कई बार उन्हें मना करना पड़ा क्योंकि रोल छोटे या सीमित सीन के होते थे। लेकिन अब उन्होंने तय किया है कि चुनौतीपूर्ण किरदार करना ही उनके करियर का अगला कदम होगा।










