कीव पर रूसी मिसाइल हमले में 12 लोगों की मौत, 34 घायल; यूक्रेन ने एयर डिफेंस की कमी पर जताई चिंता

कीव पर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में 12 लोगों की मौत और 34 घायल हुए। रिहायशी इमारतों, स्कूल व बच्चों के अस्पताल को नुकसान पहुंचा, एयर डिफेंस पर चिंता बढ़ी।

कीव पर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में 12 लोगों की मौत और 34 घायल हुए। रिहायशी इमारतों, स्कूल व बच्चों के अस्पताल को नुकसान पहुंचा, एयर डिफेंस पर चिंता बढ़ी।

रूस यूक्रेन वॉर: यूक्रेन की राजधानी कीव में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने एक बार फिर भारी तबाही मचाई है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और 34 अन्य घायल हुए। रिहायशी इमारतों, गोदामों, स्कूल और बच्चों के अस्पताल को भी नुकसान पहुंचा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि देश को रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाने के लिए पर्याप्त एयर डिफेंस इंटरसेप्टर नहीं मिल रहे हैं।

रात में शुरू हुआ मिसाइल और ड्रोन हमला

रिपोर्ट के मुताबिक, कीव में हमले स्थानीय समयानुसार आधी रात के आसपास शुरू हुए। शहर में एयर रेड सायरन बजने के बाद कई इलाकों में लगातार विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि राजधानी और आसपास के इलाकों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने कीव और आसपास के क्षेत्र में यूक्रेन के सैन्य और लॉजिस्टिक्स से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। रूसी पक्ष के मुताबिक, हमलों में ड्रोन कंपोनेंट बनाने वाली सुविधाओं, सैन्य डिपो और लॉजिस्टिक्स हब को निशाना बनाया गया।

हालांकि, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक हमलों से नागरिक इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ। कई रिहायशी इमारतें प्रभावित हुईं और कुछ स्थानों पर आग लग गई।

नौ मंजिला इमारत को भारी नुकसान

कीव के सोलोमियांस्की जिले में एक नौ मंजिला रिहायशी इमारत के ऊपरी हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा। इस इलाके में सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। बचावकर्मियों ने क्षतिग्रस्त इमारतों से लोगों को निकालने और आग पर काबू पाने का अभियान चलाया।

राजधानी के अन्य इलाकों में भी गैर-रिहायशी इमारतें, गोदाम और अन्य ढांचे प्रभावित हुए। एक स्कूल और बच्चों का अस्पताल भी हमले से क्षतिग्रस्त हुआ।

हमले के बाद कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। बिजली कंपनी DTEK के मुताबिक, लगभग 90 हजार घरों की बिजली प्रभावित हुई थी और बाद में बड़े हिस्से में आपूर्ति बहाल करने का काम शुरू किया गया।

एयर डिफेंस की कमी बनी बड़ी चिंता

यूक्रेन लंबे समय से पश्चिमी देशों से एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग कर रहा है। कीव का कहना है कि रूस के बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करने के लिए मौजूदा संसाधन पर्याप्त नहीं हैं।

राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की कमी को गंभीर समस्या बताया। उनका कहना है कि जब तक यूक्रेन के पास बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं होगी, तब तक रूस पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ाना मुश्किल रहेगा।

रूस ने हाल के महीनों में यूक्रेन पर हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाई है। Reuters के अनुसार, रूस यूक्रेन की इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

कीव में घोषित हुआ शोक दिवस

हमले में हुई मौतों के बाद कीव में मृतकों की याद में शुक्रवार को शोक दिवस घोषित किया गया। शहर के लोगों ने रातभर भूमिगत पार्किंग और अन्य सुरक्षित स्थानों में शरण ली।

हमले के बाद राजधानी में कई जगहों पर क्षतिग्रस्त इमारतों, जली हुई कारों और मलबे के दृश्य सामने आए। आपातकालीन सेवा के कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान में जुटे रहे।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन और रूस के बीच हवाई हमलों का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश एक-दूसरे पर सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के आरोप लगाते रहे हैं।

कीव क्षेत्र और डोनेट्स्क में भी नुकसान

राजधानी के अलावा कीव क्षेत्र के ब्रोवरी और बोरिस्पिल जिलों में भी हमलों की सूचना मिली। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इन इलाकों में एक व्यक्ति की मौत हुई और सात लोग घायल हुए।

डोनेट्स्क क्षेत्र में भी हमले में एक व्यक्ति की मौत और 11 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। यूक्रेन के अलग-अलग हिस्सों में लगातार रूसी हवाई हमलों के कारण नागरिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इससे पहले 18 अगस्त को खार्किव क्षेत्र के पेचेनीही गांव में रूसी मिसाइल हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत और 18 लोगों के घायल होने की सूचना मिली थी।

रोमानिया में घुसा ड्रोन, पोलैंड ने शुरू किए हवाई सुरक्षा अभियान

कीव पर हमले का असर यूक्रेन की सीमाओं से बाहर भी महसूस हुआ। रोमानिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एक ड्रोन उसके क्षेत्र में प्रवेश कर गया और बाद में एक आबादी रहित इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। घटना के बाद वहां एयर अलर्ट जारी किया गया।

रोमानिया NATO और यूरोपीय संघ का सदस्य है। यूक्रेन युद्ध के दौरान इससे पहले भी ड्रोन के रोमानियाई क्षेत्र में प्रवेश की घटनाएं सामने आती रही हैं।

पोलैंड की सेना ने भी अपनी वायु सीमा की सुरक्षा के लिए रक्षात्मक हवाई अभियान शुरू किए। यूक्रेन के पड़ोसी NATO देशों के लिए इस तरह की घटनाएं युद्ध के संभावित क्षेत्रीय विस्तार को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।

रूस और यूक्रेन दोनों के हमले तेज

रूस के हमलों के साथ यूक्रेन ने भी रूस के अंदर गहरे इलाकों को निशाना बनाने वाली ड्रोन कार्रवाई तेज की है। हाल के दिनों में मॉस्को और रूस के अन्य क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं।

यूक्रेन का दावा है कि उसके हमलों का उद्देश्य रूस के सैन्य, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नुकसान पहुंचाना है। रूस भी यूक्रेनी हमलों के जवाब में सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाने की बात कहता है।

इस बढ़ती कार्रवाई से युद्ध का दायरा और अधिक जटिल होता जा रहा है। दोनों पक्षों के हमलों में नागरिकों के मारे जाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, हालांकि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे पर नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोपों से इनकार करते हैं।

यूक्रेन में युद्ध चौथे साल से आगे बढ़ा

रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किया था। चार साल से अधिक समय बाद भी युद्ध समाप्त नहीं हुआ है। रूस अभी भी यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से पर नियंत्रण रखता है, जिसमें मुख्य रूप से पूर्वी सीमा के क्षेत्र शामिल हैं।

हाल के महीनों में दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ-साथ ऊर्जा, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स ठिकानों पर हमले भी जारी हैं।

कूटनीतिक स्तर पर युद्धविराम की कोशिशें हुई हैं, लेकिन अब तक स्थायी सीजफायर पर सहमति नहीं बन सकी है। कीव लगातार पश्चिमी देशों से अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग कर रहा है।

कीव पर हुआ ताजा हमला इस बात को रेखांकित करता है कि यूक्रेन के लिए एयर डिफेंस अभी भी सबसे महत्वपूर्ण सैन्य जरूरतों में से एक है। राजधानी में हुई मौतों और बड़े पैमाने पर नुकसान के बाद युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना है।

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