Valentine Day पर पीएम मोदी असम में चीन सीमा के पास हाईवे रनवे का उद्घाटन करेंगे। राफेल और सुखोई की लैंडिंग से भारत की वायु शक्ति और आपातकालीन सैन्य तैयारी का मजबूत संदेश दिया जाएगा।
Rafale Sukhoi: 14 फरवरी यानी Valentine Day के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसा कदम उठाने जा रहे हैं, जो सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की रणनीतिक ताकत का स्पष्ट संदेश होगा। असम में चीन सीमा के नजदीक स्थित एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनी विशेष हवाई पट्टी का उद्घाटन कर पीएम मोदी देश की रक्षा तैयारियों को दुनिया के सामने रखने वाले हैं। इस कार्यक्रम में राफेल (Rafale) और सुखोई (Sukhoi) जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की मौजूदगी इसे ऐतिहासिक बना देगी।
राजमार्ग पर बने रनवे पर उतरेगा प्रधानमंत्री का विमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी को असम के डिब्रूगढ़-मोरान खंड पर राष्ट्रीय राजमार्ग 127 पर बनी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility – ELF) का उद्घाटन करेंगे। यह पहली बार होगा जब पूर्वोत्तर भारत में किसी राष्ट्रीय राजमार्ग को इस तरह से हवाई पट्टी के रूप में विकसित किया गया है। खास बात यह है कि पीएम मोदी का विमान सीधे इसी राजमार्ग पर उतरेगा, न कि डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट पर।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री गुवाहाटी पहुंचने के बाद एक सैन्य विमान से डिब्रूगढ़ के लिए उड़ान भरेंगे और मोरान स्थित इस विशेष राजमार्ग पर लैंड करेंगे। यह दृश्य अपने आप में भारत की तकनीकी क्षमता और सैन्य आत्मविश्वास का प्रतीक होगा।
राफेल और सुखोई से होगा वायु शक्ति का प्रदर्शन
प्रधानमंत्री के विमान के उतरने के बाद भारतीय वायु सेना का विशेष एयर शो आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सुखोई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान इस आपातकालीन लैंडिंग सुविधा पर उतरेंगे और उड़ान भरेंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार यह एयर डेमोंस्ट्रेशन लगभग 30 से 40 मिनट तक चलेगा, जिसमें भारतीय वायु सेना की operational readiness को दिखाया जाएगा।
यह प्रदर्शन सिर्फ एक शो नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि भारत किसी भी आपात स्थिति में अपने फाइटर जेट्स को राजमार्ग से भी संचालित करने की क्षमता रखता है। यह चीन जैसे पड़ोसी देश के लिए भी एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
4.2 किलोमीटर लंबी मजबूत लैंडिंग स्ट्रिप

इस आपातकालीन हवाई पट्टी को खास तौर पर सैन्य और नागरिक दोनों तरह के विमानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। करीब 4.2 किलोमीटर लंबी इस लैंडिंग स्ट्रिप को प्रबलित कंक्रीट से बनाया गया है, ताकि भारी लड़ाकू विमान भी यहां सुरक्षित रूप से उतर सकें। रनवे के रूप में इसके इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए सड़क पर कोई central divider नहीं रखा गया है।
उड़ानों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सड़क के दोनों ओर मजबूत fencing की गई है, ताकि किसी भी व्यक्ति या जानवर का प्रवेश न हो सके। कार्यक्रम से पहले सुरक्षा कारणों से सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों को भी हटा दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी
डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए 6 फरवरी से ही इस ELF क्षेत्र में आम जनता और वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। पूरे इलाके को high security zone घोषित किया गया है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की तैयारी में जुटी हुई हैं।
यह साफ है कि सरकार इस कार्यक्रम को किसी भी तरह की चूक के बिना संपन्न कराना चाहती है, क्योंकि यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
पीएम मोदी का असम दौरा
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले तीन महीनों में असम की तीसरी यात्रा होगी। डिब्रूगढ़ जाने से पहले वे गुवाहाटी और उत्तरी गुवाहाटी को जोड़ने वाले कुमार भास्कर वर्मा पुल का उद्घाटन करेंगे। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना है और क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।
इसके अलावा पीएम मोदी गुवाहाटी स्थित Indian Institute of Management के अस्थायी परिसर का उद्घाटन भी करेंगे, जिससे पूर्वोत्तर में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वे गुवाहाटी के लिए 100 electric buses को हरी झंडी दिखाएंगे, जो clean energy और sustainable transport की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
LAC के पास ELF का रणनीतिक महत्व
मोरान में बनी यह आपातकालीन लैंडिंग सुविधा रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह क्षेत्र चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control – LAC) और म्यांमार सीमा से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में किसी भी सैन्य तनाव या आपात स्थिति में यह रनवे भारत के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
अगर कभी संघर्ष की स्थिति में डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट या चाबुआ एयरफोर्स स्टेशन अनुपलब्ध हो जाते हैं, तो यही राजमार्ग फाइटर जेट्स के संचालन का वैकल्पिक आधार बन सकता है। इससे भारतीय वायु सेना की flexibility और response capability कई गुना बढ़ जाती है।













