Nepal ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। नेपाली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा कि लिपुलेख मुद्दे पर नेपाल पहले ही अपना पक्ष सार्वजनिक कर चुका है।
काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। नेपाल ने हाल ही में कहा है कि वह भारत के साथ विवादित सीमा मुद्दों को कूटनीतिक और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lok Bahadur Chhetri ने कहा कि नेपाल सरकार ऐतिहासिक दस्तावेजों, मानचित्रों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सीमा विवाद का समाधान चाहती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने पारंपरिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को महत्व देता है और इसी भावना के अनुरूप बातचीत के जरिए समाधान चाहता है।
क्या है लिपुलेख विवाद?
लिपुलेख दर्रा हिमालयी क्षेत्र में स्थित एक रणनीतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाका है। यह भारत, नेपाल और चीन के बीच त्रि-जंक्शन क्षेत्र के करीब पड़ता है। नेपाल का दावा है कि लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र उसके अभिन्न हिस्से हैं, जो 1816 की सुगौली संधि के आधार पर नेपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
दूसरी ओर, भारत इन क्षेत्रों को अपने प्रशासनिक नियंत्रण का हिस्सा मानता है। नई दिल्ली का कहना है कि नेपाल के दावे “एकतरफा” हैं और भारत उन्हें स्वीकार नहीं करता।
कैलाश मानसरोवर यात्रा बना नया विवाद

विवाद तब फिर चर्चा में आया जब Ministry of External Affairs ने घोषणा की कि कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त 2026 के बीच दो मार्गों — उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला — से आयोजित की जाएगी। नेपाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लिपुलेख उसका क्षेत्र है और इस मार्ग के उपयोग से पहले उसकी सहमति आवश्यक है। नेपाली विदेश मंत्रालय ने भारत और चीन दोनों के सामने अपनी चिंता दर्ज कराई है।
नेपाल का कूटनीतिक रुख
नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य सीमा विस्तार नहीं, बल्कि अपने दावों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करना है। नेपाली अधिकारियों के अनुसार, सीमा विवाद को संवाद, सहयोग और पारस्परिक सम्मान के आधार पर हल किया जाना चाहिए। नेपाल सरकार के प्रवक्ता Sasmita Pokharel ने कहा कि नेपाल इस मुद्दे पर अपने रुख पर कायम है, लेकिन वह किसी भी प्रकार के टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देता है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी स्थिति स्पष्ट और स्थिर है। भारतीय पक्ष का मानना है कि लिपुलेख क्षेत्र भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में है और यहां होने वाली गतिविधियां वैध हैं। भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद कई वर्षों से मौजूद है, लेकिन दोनों देशों ने अब तक संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखे हैं। दोनों पड़ोसी देशों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक संबंध भी बेहद गहरे हैं, इसलिए सीमा विवाद को संवेदनशील विषय माना जाता है।
Mount Kailash और Lake Manasarovar हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में हिस्सा लेते हैं।









