लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद Dharmendra Yadav ने तेलगु देशम पार्टी को विपक्षी गठबंधन में शामिल होने का ऑफर दिया। उन्होंने भाजपा गठबंधन पर सवाल उठाते हुए आंध्र प्रदेश के मुद्दों को लेकर चेतावनी भी दी।
New Delhi: लोकसभा में बुधवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने तेलगु देशम पार्टी (TDP) को INDIA गठबंधन में शामिल होने का खुला ऑफर दे दिया। उन्होंने संसद में बोलते हुए सीधे तौर पर TDP को भाजपा के साथ गठबंधन पर पुनर्विचार करने की सलाह दी और कहा कि अगर समय रहते फैसला नहीं लिया गया तो इसका असर आंध्र प्रदेश पर पड़ सकता है।
भाजपा गठबंधन पर सपा का हमला
धर्मेंद्र यादव ने अपने संबोधन में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि TDP को यह समझना चाहिए कि भाजपा के साथ गठबंधन का क्या असर हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसानों के साथ जो स्थिति बनी, वैसी ही स्थिति आंध्र प्रदेश में भी बन सकती है अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान अयोध्या और राम मंदिर जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन किसानों की समस्याएं पीछे छूट गईं। उनका आरोप था कि अयोध्या के किसानों को उचित मुआवजा तक नहीं मिला, जिससे यह सवाल उठता है कि विकास और वादों के बीच संतुलन कितना सही रहा।
TDP को सीधा संदेश
सपा सांसद ने TDP को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा, "साइकिल वालों इधर आ जाओ, उधर जो भी गया है उसका बुरा हाल हुआ है।" इस बयान के जरिए उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि विपक्षी गठबंधन में शामिल होना TDP के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में कई ऐसे नेता मौजूद हैं, जिन्होंने पहले भाजपा के साथ गठबंधन किया, लेकिन बाद में उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। इस संदर्भ में उन्होंने एकनाथ शिंदे और नीतीश कुमार के दलों का जिक्र किया, जिससे उनका इशारा साफ था कि गठबंधन की राजनीति में जोखिम हमेशा बना रहता है।
आंध्र प्रदेश के किसानों का मुद्दा
धर्मेंद्र यादव ने अपने भाषण में आंध्र प्रदेश के किसानों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों को लेकर गंभीरता से सोचना जरूरी है और किसी भी राजनीतिक निर्णय का असर सीधे उन पर पड़ता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर TDP ने भाजपा के साथ रहते हुए किसानों के मुद्दों को नजरअंदाज किया, तो इसका परिणाम भविष्य में गंभीर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के हितों को प्राथमिकता देना हर सरकार की जिम्मेदारी है।

विशेष राज्य का दर्जा बना बड़ा मुद्दा
सपा सांसद ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा (Special Category Status) देने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह मांग लंबे समय से लंबित है और अब तक इसे पूरा नहीं किया गया है।
उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है, तो इसे अब तक हल क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार, विशेष राज्य का दर्जा मिलने से आंध्र प्रदेश के विकास को गति मिल सकती है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
मुलायम सिंह यादव के विचारों का जिक्र
धर्मेंद्र यादव ने अपने भाषण में सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के विचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नेताजी हमेशा छोटे राज्यों के गठन के खिलाफ थे।
उनका मानना था कि छोटे राज्यों को अक्सर केंद्र सरकार के सामने आर्थिक सहायता के लिए निर्भर रहना पड़ता है। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आज आंध्र प्रदेश की स्थिति कुछ हद तक वैसी ही दिखाई देती है, जहां राज्य को अपने विकास के लिए केंद्र पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
TDP और भाजपा का पुराना रिश्ता
तेलगु देशम पार्टी (TDP) और भाजपा के बीच गठबंधन का इतिहास भी इस चर्चा का हिस्सा बना। TDP लंबे समय से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करती रही है।
इसी मुद्दे को लेकर साल 2018 में TDP ने भाजपा से अलग होने का फैसला लिया था। उस समय यह मुद्दा दोनों दलों के बीच तनाव का बड़ा कारण बना था। हालांकि, 2024 में दोनों दलों ने फिर से गठबंधन किया और चुनाव में साथ मिलकर हिस्सा लिया।
फिर से उठी मांग और नई राजनीति
2024 में गठबंधन बनने के बाद TDP ने एक बार फिर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग को जोर-शोर से उठाया है। वहीं भाजपा का कहना है कि वह राज्य को विशेष पैकेज (Special Package) और आर्थिक सहायता देने के लिए तैयार है।
इस मुद्दे ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। एक तरफ विकास और आर्थिक मदद की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक गठजोड़ और उसके प्रभाव पर चर्चा तेज हो गई है।
गठबंधन राजनीति में बढ़ती हलचल
लोकसभा में दिए गए इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में गठबंधन राजनीति और भी दिलचस्प हो सकती है। INDIA गठबंधन की ओर से TDP को दिया गया यह ऑफर राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है।
हालांकि, अभी तक TDP की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा जरूर तेज कर दी है।








