भारतीय शेयर बाजार से हाल के महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के बीच सरकार ने निवेश माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।
बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार ने विदेशी निवेशकों (FIIs/FPIs) को आकर्षित करने के लिए हाल ही में सरकारी बॉन्ड्स पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) में बड़ी राहत दी है। अब इस कदम को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ संकेत दिया है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में निवेश बढ़ाने के लिए और भी बड़े आर्थिक सुधार किए जा सकते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली देखने को मिली है और सरकार विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
सरकार का फोकस: बॉन्ड मार्केट को मजबूत करना
नई दिल्ली में आयोजित माइंडमाइन समिट 2026 में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बॉन्ड मार्केट को और मजबूत बनाना है ताकि देश में आने वाली पूंजी को बेहतर तरीके से आकर्षित और उपयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक यह टैक्स राहत केवल सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) तक सीमित रखी है, लेकिन यह प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती।
वित्त मंत्री के अनुसार, “बॉन्ड मार्केट आने वाली पूंजी को खपाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। अभी यह राहत केवल सरकारी सिक्योरिटीज तक है, लेकिन आगे और भी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।”
विदेशी निवेश बढ़ाने की रणनीति

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत को अधिक विदेशी पूंजी की आवश्यकता है और इसके लिए नीतिगत बदलावों का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में किए गए टैक्स सुधार “अंतिम कदम नहीं” हैं, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार को घरेलू निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने इक्विटी बाजार को स्थिरता और मजबूती दी है। उनके अनुसार, “घरेलू निवेशकों की भागीदारी ने बाजार को बाहरी झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
क्या बदला है टैक्स सिस्टम में?
हाल ही में सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है: सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) की बिक्री पर LTCG टैक्स से छूट. ऐसे निवेश से होने वाली ब्याज आय पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स को खत्म किया गया. इससे पहले स्थिति यह थी कि, 12 महीने से अधिक अवधि के G-Secs पर 12.5% LTCG टैक्स लागू था. ब्याज आय पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स देना पड़ता था. इस बदलाव से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड अधिक आकर्षक बन गए हैं।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ सकता है, जिससे सरकार के लिए उधारी लागत में भी सुधार देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, मजबूत विदेशी निवेश प्रवाह से रुपये पर दबाव कम होने और वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल टैक्स सुधार पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि निवेश माहौल को और सरल बनाने के लिए नियामकीय सुधारों की भी जरूरत होगी।











