Lucknow Fire Case: अलीगंज अग्निकांड में 18 अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में LDA ने 18 अधिकारियों और अभियंताओं की जिम्मेदारी तय की। शासन को विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भेजी गई।

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में एलडीए ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 अधिकारियों और अभियंताओं की जिम्मेदारी तय की है। जांच रिपोर्ट में अवैध निर्माण और मानचित्र उल्लंघन को लेकर गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद शासन को कार्रवाई की सिफारिश भेजी गई है।

लखनऊ: अलीगंज अग्निकांड की जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण की जांच में अवैध निर्माण और मानचित्र नियमों के उल्लंघन को लेकर कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद तत्कालीन विहित प्राधिकारी, जोनल अधिकारियों और अभियंताओं समेत 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

फाइलों की समीक्षा में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मामले से जुड़ी सभी फाइलों की विस्तृत समीक्षा कराई। जांच के दौरान भवन के आवंटन, रजिस्ट्री, मानचित्र स्वीकृति और निर्माण से जुड़े विभिन्न चरणों की पड़ताल की गई। इसके साथ ही यह भी जांचा गया कि संबंधित अधिकारियों ने अवैध निर्माण रोकने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए थे।

Lucknow Fire Case: अलीगंज अग्निकांड में 18 अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

जांच में पाया गया कि कई स्तरों पर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई में गंभीर चूक हुई, जिसके कारण वर्षों तक नियमों का उल्लंघन जारी रहा।

आवासीय भवन में चलती रहीं व्यावसायिक गतिविधियां

रिपोर्ट के अनुसार जिस भवन का नक्शा एकल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था, वहां समय के साथ बहुमंजिला व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

एलडीए का मानना है कि समय रहते निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई होती तो अवैध निर्माण और मानचित्र उल्लंघन की स्थिति को रोका जा सकता था। जांच में इसे प्रशासनिक लापरवाही का प्रमुख कारण माना गया है।

ध्वस्तीकरण आदेश हटाने पर उठे सवाल

जांच रिपोर्ट में वर्ष 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश का भी उल्लेख किया गया है। अभिलेखों के अनुसार भवन के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी हुआ था, लेकिन बाद में निर्माणकर्ता के आवेदन पर इसे समाप्त कर दिया गया।

एलडीए ने सवाल उठाया है कि आदेश निरस्त करने के बाद भवन की वास्तविक स्थिति और उपयोग की दोबारा जांच क्यों नहीं कराई गई। रिपोर्ट में इस फैसले को भी गंभीर प्रशासनिक चूक के रूप में देखा गया है।

18 अधिकारियों और अभियंताओं की जिम्मेदारी तय

जांच के आधार पर तत्कालीन विहित प्राधिकारी सहित प्रवर्तन जोन-4 में विभिन्न समय पर तैनात रहे अधिकारियों और अभियंताओं की जवाबदेही तय की गई है। इनमें जोनल अधिकारी, सहायक अभियंता और अवर अभियंता शामिल हैं।

एलडीए उपाध्यक्ष ने सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।

शासन के निर्णय पर टिकी निगाहें

रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अब सभी की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर हैं। यदि संस्तुतियों को मंजूरी मिलती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और निर्माण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो।

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