लखनऊ की नैनीताल बैंक डालीगंज शाखा में फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र लगाकर नौ Home Loan लेने का मामला सामने आया है। करीब 1.87 करोड़ रुपये की बकाया राशि के मामले में 18 लोगों पर FIR दर्ज हुई है।
लखनऊ: नैनीताल बैंक की डालीगंज शाखा में फर्जी पहचान पत्र और संपत्ति दस्तावेजों के जरिए नौ आवास ऋण लेकर करीब 1.87 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। किश्तें नहीं चुकाने पर बैंक ने जांच कराई, जिसमें संपत्ति के कागजात पर फर्जी मोहर और हस्ताक्षर मिले। इसके बाद लोन धारकों, बैंक के पैनल अधिवक्ताओं और वैल्यूअर समेत 18 लोगों के खिलाफ हसनगंज कोतवाली में FIR दर्ज की गई।
नौ Home Loan में सामने आया फर्जीवाड़ा
नैनीताल बैंक की डालीगंज शाखा में वर्ष 2025 के दौरान स्वीकृत किए गए नौ आवास ऋणों में कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक के अनुसार, इन ऋण खातों में वर्तमान बकाया राशि करीब 1,87,55,682 रुपये है।
शाखा प्रबंधक के मुताबिक, 17 मई से 27 जून 2025 के बीच नौ Home Loan स्वीकृत किए गए थे। ऋण लेने के बाद संबंधित खातों में किश्तों का भुगतान नहीं हुआ। इसके चलते बैंक ने खातों को NPA की श्रेणी में डाल दिया।
किश्तें नहीं आने पर बैंक की ओर से लोन धारकों को नोटिस भेजे गए। जवाब नहीं मिलने के बाद बैंक ने गिरवी रखी गई संपत्तियों और उनसे जुड़े दस्तावेजों का आंतरिक सत्यापन कराया। इसी जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
संपत्ति के कागजात पर फर्जी मोहर और हस्ताक्षर
बैंक की जांच में लोन के लिए जमा किए गए बिक्री विलेख, पहचान पत्र और संपत्ति से जुड़े अन्य दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। आरोप है कि कुछ दस्तावेजों पर फर्जी मोहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था।
मामले में यह भी आरोप है कि वास्तविक संपत्ति मालिकों की जगह दूसरे लोगों को पेश करके संपत्तियों को बैंक के पास बंधक रखा गया। बैंक की ओर से कराई गई मौके की जांच में कुछ वास्तविक मालिकों ने इन संपत्तियों पर लोन लिए जाने की जानकारी से इनकार किया।
बैंक के अनुसार, कुछ मामलों में लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए संपत्ति के स्वामित्व और मूल्यांकन से जुड़ी रिपोर्ट भी इस्तेमाल की गई थीं।
बैंक के अधिवक्ता और वैल्यूअर पर भी आरोप
मामले में बैंक के पैनल अधिवक्ता आशीष सिंह और नरेंद्र सिंह मेहता तथा पैनल वैल्यूअर सत्येंद्र कुमार वर्मा पर भी आरोप लगाए गए हैं।
बैंक का आरोप है कि अधिवक्ताओं की ओर से संपत्ति के स्वामित्व को लेकर गलत रिपोर्ट तैयार की गई, जबकि वैल्यूअर पर संपत्तियों का अधिक मूल्यांकन करने का आरोप है। बैंक का कहना है कि इन रिपोर्टों के आधार पर ऋण प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
शाखा प्रबंधक की ओर से हसनगंज कोतवाली और वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट का रुख किया गया। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की।
18 लोगों के खिलाफ FIR, पुलिस जांच जारी
हसनगंज पुलिस ने लोन धारकों, बैंक से जुड़े अधिवक्ताओं और वैल्यूअर समेत कुल 18 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। FIR में भारती अग्रवाल, रूचि अग्रवाल, ज्ञान सिंह, बाबू लाल, आशीष सिंह, नरेंद्र सिंह मेहता, सत्येंद्र कुमार वर्मा, भावना रस्तोगी, दिवाकर उपाध्याय, अभिषेक अस्थाना, मोहम्मद उमैर, शेख मोहम्मद सलीम, मोहम्मद रेहान, आफताब आलम, शहजाद आलम, मुकेश यादव, मार्डन फर्नीचर और मो. उमेर के नाम शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान लोन आवेदन, संपत्ति के दस्तावेज, पहचान पत्र, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अलग-अलग लोन में 18 से 20 लाख रुपये तक की राशि शामिल है। इसके अलावा मार्डन फर्नीचर के नाम पर 9.50 लाख रुपये और मो. उमेर के नाम पर 10 लाख रुपये का लोन भी दर्ज है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े में प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट होगी।











