लखनऊ में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, ₹18,000 न्यूनतम वेतन समेत कई मांगों को लेकर शक्ति भवन पर धरना

लखनऊ के शक्ति भवन पर आउटसोर्स कर्मचारियों ने ₹18,000 न्यूनतम वेतन, बहाली, बकाया वेतन और श्रम कानूनों के पालन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

लखनऊ में यूपी पावर कॉरपोरेशन के आउटसोर्स कर्मचारियों ने शक्ति भवन पर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने ₹18,000 न्यूनतम वेतन, हटाए गए कर्मचारियों की बहाली, बकाया वेतन भुगतान और श्रम कानूनों के पालन समेत कई मांगें उठाईं।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को शक्ति भवन के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन अपने ही आदेशों का पालन नहीं कर रहा है और बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा रहा है। वार्ता के बावजूद फिलहाल कोई समाधान नहीं निकल सका।

शक्ति भवन पर जुटे आउटसोर्स कर्मचारी, कई मांगों को लेकर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा एवं संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों ने लखनऊ स्थित शक्ति भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि कॉरपोरेशन प्रबंधन अपने ही आदेशों का पालन नहीं कर रहा है और हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें लगातार अनदेखा किया जा रहा है।

₹18,000 न्यूनतम वेतन सहित कई प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कई मांगें सरकार और प्रबंधन के सामने रखीं। इनमें सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की बहाली, ₹18,000 न्यूनतम वेतन लागू करना, कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, ईपीएफ से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच, बकाया वेतन का भुगतान और श्रम कानूनों का प्रभावी पालन शामिल है।

संघ ने नवगठित आउटसोर्स सेवा निगम में कर्मचारियों को शामिल किए जाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उनकी सेवा शर्तों और रोजगार सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

प्रबंधन से वार्ता बेनतीजा, जेई संगठन ने भी उठाई मांग

धरने के दौरान दोपहर करीब दो बजे कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों और पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक के बीच बातचीत हुई। हालांकि दोनों पक्षों के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारियों ने अपना प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया और कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

इधर, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन ने भी वर्ष 2023 के आंदोलन से जुड़े जूनियर इंजीनियरों और अन्य विद्युतकर्मियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई समाप्त करने की मांग की है। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष गोपाल वल्लभ पटेल ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस ली जानी चाहिए। उन्होंने लंबित पदोन्नति, स्थायीकरण, एसीपी और अन्य सेवा संबंधी मामलों का शीघ्र समाधान करने की भी मांग की।

फिलहाल आउटसोर्स कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच गतिरोध बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और व्यापक बनाया जाएगा। वहीं, प्रबंधन की ओर से वार्ता जारी रखने की बात कही गई है।

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