लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यालय के बाहर शनिवार को एक राजनीतिक होर्डिंग लगाए जाने के बाद यह चर्चा का विषय बन गया। होर्डिंग पर Gen Z के बीच वायरल हुए तुकबंदी वाले नारों की तर्ज पर भाजपा और चुनाव व्यवस्था को लेकर संदेश लिखे गए हैं। यह होर्डिंग सपा नेता मोहम्मद इखलाक की ओर से लगाया गया है। इसमें लिखा है- ‘एक कचौड़ी, दो समोसा... जनता को भाजपा पर नहीं रहा भरोसा’। इसके साथ ही चुनाव आयोग को लेकर भी इसी शैली में एक संदेश लिखा गया है।
होर्डिंग के जरिए सपा नेता ने युवाओं और चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक बात रखने की कोशिश की है। हालांकि, होर्डिंग पर लिखे गए संदेश राजनीतिक आरोप और पार्टी की ओर से व्यक्त विचार हैं, इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
सपा कार्यालय के बाहर लगाए गए इस होर्डिंग में इस्तेमाल की गई भाषा सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में चर्चित हुए छोटे और तुकबंदी वाले नारों से मिलती-जुलती है। Gen Z के बीच इस तरह के छोटे वाक्यों और मीम शैली के संदेशों का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए किया जाता रहा है। इसी पैटर्न को राजनीतिक संदेश के रूप में इस्तेमाल करते हुए यह होर्डिंग तैयार किया गया है।
होर्डिंग में एक तरफ खाने-पीने की चीजों का जिक्र करते हुए भाजपा को लेकर टिप्पणी की गई है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग को लेकर भी संदेश दिया गया है। इससे साफ है कि होर्डिंग लगाने वाले नेता ने अपने संदेश में राजनीतिक दल के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया से जुड़े संस्थान को भी मुद्दा बनाया है।
मोहम्मद इखलाक की ओर से लगाए गए इस होर्डिंग में युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे सोशल मीडिया नारों की भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य पार्टी कार्यालय के बाहर से गुजरने वाले लोगों और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं का ध्यान आकर्षित करना बताया जा रहा है। होर्डिंग के सामने से गुजरने वाले लोगों के बीच भी इसकी चर्चा हुई।
इस तरह के राजनीतिक होर्डिंग उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई नई बात नहीं हैं। अलग-अलग राजनीतिक दल और उनके नेता समय-समय पर पोस्टर, बैनर और होर्डिंग के जरिए अपने विरोधियों पर निशाना साधते रहे हैं। सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक संदेशों में लोकप्रिय मीम, वायरल वाक्य और ट्रेंडिंग भाषा का इस्तेमाल भी बढ़ा है।
इस होर्डिंग में ‘भरोसा’ शब्द को प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया है। सपा नेता की ओर से भाजपा को लेकर लगाया गया संदेश सीधे तौर पर जनता के भरोसे को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करता है। हालांकि, जनता का किसी दल पर भरोसा है या नहीं, इसका आकलन केवल एक होर्डिंग से नहीं किया जा सकता। यह संदेश होर्डिंग लगाने वाले नेता के राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
चुनाव आयोग से संबंधित संदेश भी राजनीतिक बहस का हिस्सा है। चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची, चुनाव प्रबंधन और आयोग की भूमिका जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। ऐसे में होर्डिंग के जरिए चुनाव आयोग पर टिप्पणी करना भी सपा नेता के राजनीतिक संदेश का हिस्सा है।
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। पार्टी से जुड़े नेता और कार्यकर्ता यहां समय-समय पर सरकार, भाजपा और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर अपनी बात रखते हैं। कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर और होर्डिंग अक्सर राजनीतिक संदेशों के माध्यम बनते हैं।
इस बार लगाए गए होर्डिंग में पारंपरिक राजनीतिक भाषा के बजाय हल्के-फुल्के और तुकबंदी वाले अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ जैसे शब्दों के जरिए संदेश को याद रखने योग्य और सोशल मीडिया के अनुकूल बनाने का प्रयास नजर आता है। इसके बाद भाजपा को लेकर लगाए गए वाक्य के माध्यम से राजनीतिक निशाना साधा गया है।
होर्डिंग सामने आने के बाद यह भी चर्चा हो रही है कि राजनीतिक दल और उनके नेता अब युवाओं की सोशल मीडिया भाषा को अपने प्रचार और राजनीतिक संवाद में तेजी से शामिल कर रहे हैं। मीम, शॉर्ट वीडियो, वायरल स्लोगन और तुकबंदी वाले वाक्यों के जरिए राजनीतिक संदेश को अधिक लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, किसी भी राजनीतिक होर्डिंग में लगाए गए आरोपों और दावों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि वे संबंधित राजनीतिक पक्ष का बयान होते हैं। भाजपा या चुनाव आयोग की ओर से इस विशेष होर्डिंग में लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, यह उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इसलिए होर्डिंग के संदेश को सपा नेता की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप और टिप्पणी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर लगा यह होर्डिंग फिलहाल राजनीतिक चर्चा का विषय है। इसमें Gen Z के वायरल नारों की शैली को अपनाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग को लेकर संदेश दिया गया है। राजनीतिक दलों की ओर से सोशल मीडिया और युवा वर्ग में लोकप्रिय भाषा का इस्तेमाल आने वाले समय में चुनावी संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।










