लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन चर्चा में रहा। सपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज क्षेत्र में प्रदर्शन करते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाकर हिरासत में लिया और बाद में उन्हें ईको गार्डन भेजा गया।
प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने CEC के नाम से एक प्रतीकात्मक 'अस्थि कलश यात्रा' भी निकाली। कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन को लेकर इलाके में काफी देर तक हलचल बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। जब कार्यकर्ता पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें मौके से हटाना शुरू किया। इसी दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, उनका विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर है। सपा कार्यकर्ता CEC के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे पहले भी लखनऊ में सपा और कांग्रेस की ओर से इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किए जा चुके हैं। 28 सितंबर को सपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज चौराहे पर CEC के पुतले पर कालिख पोती थी और पुलिस के साथ उनकी नोकझोंक हुई थी।
सोमवार के प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे जाने से रोकने की कोशिश की।
इसी दौरान 'अस्थि कलश यात्रा' का कार्यक्रम भी सामने आया। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर निकाला। कलश लेकर कार्यकर्ता आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिसकर्मियों ने कुछ लोगों को उठाकर वहां से हटाया। इसी कार्रवाई का वीडियो और प्रदर्शन से जुड़े दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने पहले उन्हें समझाने का प्रयास किया। जब प्रदर्शनकारी वहां से हटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस ने एक-एक कर उन्हें उठाना शुरू किया। हजरतगंज क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरातफरी की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर ईको गार्डन भेज दिया।
लखनऊ में पिछले कुछ दिनों से SIR को लेकर राजनीतिक दलों के प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। 25 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका था और पुलिस तथा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की खबर सामने आई थी।
28 सितंबर को सपा और कांग्रेस दोनों ने लखनऊ में अलग-अलग प्रदर्शन किए थे। सपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज में CEC का पुतला लेकर विरोध जताया था, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम मुख्यालय से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च निकाला था। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक हुई और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
इस बार सपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन में 'अस्थि कलश यात्रा' का तरीका चर्चा का केंद्र रहा। कार्यकर्ताओं ने कलश के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाकर यातायात और सामान्य गतिविधियों को बहाल करने की कोशिश की।
प्रदर्शन के कारण हजरतगंज क्षेत्र में भी कुछ समय के लिए लोगों को परेशानी हुई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने और पुलिस बल की मौजूदगी के कारण इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और बल का इस्तेमाल किया।
सपा की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकना बताया गया। दोनों पक्षों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया।
लखनऊ में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन का यह सिलसिला आने वाले दिनों में भी चर्चा में रह सकता है। फिलहाल सपा कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन में CEC के नाम से निकाली गई प्रतीकात्मक 'अस्थि कलश यात्रा', पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की और प्रदर्शनकारियों को कंधे पर उठाकर हटाने की तस्वीरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।












