Magh Mela के दौरान नियम उल्लंघन के आरोप में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े दो शिविरों को नोटिस जारी किया है। मौनी अमावस्या पर वाहन प्रवेश और बैरियर तोड़ने को गंभीर माना गया है।
UP News: प्रयागराज में चल रहे माघ मेला (Magh Mela) के दौरान नियम उल्लंघन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या जैसे संवेदनशील स्नान पर्व पर हुए घटनाक्रम के बाद मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उनके दो शिविरों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे में जवाब मांगा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर स्थायी प्रतिबंध (Permanent Ban) तक लगाया जा सकता है।
यह मामला सिर्फ नियम तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
किन शिविरों पर हुआ एक्शन
मेला प्राधिकरण की ओर से यह नोटिस श्री शंकराचार्य आश्रम और बद्रीनाथ हिमालय सेवा शिविर के संचालकों को भेजा गया है। दोनों शिविर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि इन शिविरों की गतिविधियों से मेला क्षेत्र की व्यवस्था प्रभावित हुई और लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी।
नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि माघ मेले जैसे विशाल आयोजन में नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, चाहे वह कोई भी व्यक्ति या संस्था क्यों न हो।
मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था
प्राधिकरण के अनुसार 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। इस दिन विशेष निर्देश जारी किए गए थे कि मेला क्षेत्र में केवल पैदल आवागमन की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार के वाहन प्रवेश पर पूरी तरह रोक थी।
आरोप है कि इसी दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों ने पालकी रथ यात्रा (Palki Rath Yatra) के दौरान आरक्षित श्रेणी पीपा नंबर दो पर लगे बैरियर को तोड़ दिया। इसके बाद बिना अनुमति वाहन सहित संगम अपर मार्ग से प्रवेश किया गया।
प्रशासन ने क्यों माना इसे गंभीर उल्लंघन

मेला प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील होती है। लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए मौजूद रहते हैं और जरा सी लापरवाही से भगदड़ (Stampede) जैसी स्थिति बन सकती है।
नोटिस में कहा गया है कि इस तरह से वाहन प्रवेश करने से अफरा-तफरी मची और भीड़ नियंत्रण में गंभीर कठिनाइयां आईं। अगर स्थिति बिगड़ती तो इसका खामियाजा निर्दोष श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ सकता था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन का आरोप
नोटिस में एक और अहम बिंदु उठाया गया है। मेला प्राधिकरण ने आरोप लगाया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड और होर्डिंग लगाए।
प्राधिकरण का कहना है कि यह न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना है। सार्वजनिक स्थल पर इस तरह की उपाधि का प्रयोग नियमों के खिलाफ बताया गया है।
24 घंटे का अल्टीमेटम
मेला प्राधिकरण ने नोटिस में साफ किया है कि संबंधित संस्थाओं को 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि शिविरों को दी गई सुविधाएं और भूमि आवंटन रद किया जा सकता है। इसके साथ ही भविष्य में माघ मेला क्षेत्र में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।
मेला प्रशासन का सख्त संदेश
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम है, जहां सुरक्षा और अनुशासन सर्वोपरि है। किसी भी व्यक्ति या संस्था को नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। प्रशासन का कहना है कि यदि एक मामले में ढील दी गई तो अन्य लोग भी नियम तोड़ने का साहस करेंगे, जिससे मेले की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पक्ष की प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र सरकार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बदले की भावना (Political Vendetta) से काम कर रही है।
उनका आरोप है कि मेला प्राधिकरण ने बिना पूर्व सूचना दिए शिविर के पीछे की दीवार पर बैक डेट में नोटिस चस्पा किया। कर्मचारियों से जानकारी मिलने के बाद ही इस नोटिस का पता चला। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस का जवाब तैयार किया जा रहा है और जल्द ही प्राधिकरण को भेज दिया जाएगा।










