उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 144 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय दर्ज की है। वर्ष 2018 में दान गिनती के दौरान हुई चोरी के बाद लागू की गई सख्त सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया ने श्रद्धालुओं का भरोसा मजबूत किया है।
Ujjain: मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 144 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय दर्ज की है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि वर्ष 2018 में दान पेटी की गिनती के दौरान हुई चोरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को पूरी तरह मजबूत किया गया, जिसका सकारात्मक असर श्रद्धालुओं के विश्वास और दान संग्रह दोनों पर दिखाई दे रहा है।
144 करोड़ की रिकॉर्ड आय, दान पेटियों से मिला सबसे अधिक योगदान
महाकालेश्वर मंदिर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 144 करोड़ रुपये की आय दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 27 करोड़ रुपये अधिक है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, सबसे बड़ा योगदान मंदिर परिसर में रखी 95 दान पेटियों से मिला, जिनसे करीब 62 करोड़ रुपये नकद प्राप्त हुए।
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इसके अलावा ऑनलाइन क्यूआर कोड के माध्यम से लगभग 3.6 करोड़ रुपये, कैश काउंटरों से 5.5 करोड़ रुपये और अन्नक्षेत्र के जरिए 3.38 करोड़ रुपये की आय हुई। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
2018 की चोरी के बाद पूरी व्यवस्था बदली
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 22 अगस्त 2018 को दान पेटियों की गिनती के दौरान एक कर्मचारी को सीसीटीवी कैमरों में नोट छिपाते हुए पकड़ा गया था। घटना के सामने आने के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज की गई और पूरी दान गिनती व्यवस्था की समीक्षा की गई।
इसके बाद मंदिर प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए। दान की गिनती का कार्य मंदिर कर्मचारियों के बजाय बैंक कर्मचारियों को सौंपा गया। पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए।
बिना जेब वाले कपड़े पहनकर होती है दान की गिनती
मौजूदा व्यवस्था के तहत दान पेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष काउंटिंग रूम में पहुंचाया जाता है। गिनती शुरू होने से पहले सभी कर्मचारियों की एंट्री और बाहर निकलते समय गहन तलाशी ली जाती है।
सबसे खास नियम यह है कि नकदी की गिनती करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले विशेष कपड़े और सादे एप्रन पहनने होते हैं। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता या नकदी छिपाने की संभावना को लगभग समाप्त किया जा सके। पूरी गिनती प्रक्रिया हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है और कंट्रोल रूम से इसकी लाइव मॉनिटरिंग भी की जाती है।
पारदर्शिता से बढ़ा श्रद्धालुओं का भरोसा
मंदिर प्रशासन का कहना है कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया का सीधा असर मंदिर की आय पर दिखाई दिया है। वर्ष 2021-22 के बाद से दान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
मंदिर के विधिक अधिकारी प्रतीक द्विवेदी के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से दान गिनती से जुड़ी किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, बैंक कर्मचारियों की भागीदारी और कड़ी निगरानी ने दान प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया है। यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और मंदिर की आय भी नए रिकॉर्ड बना रही है।









