यमन के हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने मक्का रक्षा गठबंधन के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा में सहयोग का संकल्प लिया है।
World News: यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने अपने नए रक्षा समझौते को सक्रिय करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। तीनों देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने रियाद में बैठक कर सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति और उसके सामने मौजूद खतरों की समीक्षा की। बैठक में सामूहिक रक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
यह बैठक मक्का संयुक्त रक्षा समझौते (Makkah Joint Defence Agreement) के तहत हुई है। तीनों देशों ने अगस्त 2026 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते की प्रमुख शर्त यह है कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
हूती हमलों के बीच रियाद में अहम बैठक
25 सितंबर को रियाद में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के रक्षा प्रमुखों तथा जनरल स्टाफ के प्रमुखों ने मुलाकात की। बैठक में सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ हालिया हमलों पर चर्चा हुई। तीनों देशों ने मक्का और सऊदी अरब के नागरिक एवं आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की निंदा की।
बैठक में सैन्य खुफिया सहयोग, आपसी समन्वय और रक्षा क्षमताओं के एकीकरण को मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार किया गया। आधिकारिक बयानों में तीनों देशों ने सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई।
हाल के दिनों में हूती हमलों ने इस रक्षा समझौते की वास्तविक उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। 19 सितंबर को सऊदी अरब ने कहा था कि हूतियों की ओर से रियाद को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के आसपास भी हमलों की खबरें सामने आई हैं।
क्या सिर्फ बयान तक सीमित है रक्षा साझेदारी?

मक्का रक्षा समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान मौजूद है, लेकिन इसके वास्तविक सैन्य इस्तेमाल का सवाल अभी महत्वपूर्ण बना हुआ है। पाकिस्तान और तुर्किये ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है, लेकिन रियाद को किस प्रकार की प्रत्यक्ष सैन्य सहायता दी जाएगी, इसका विस्तृत सार्वजनिक खाका अभी सामने नहीं आया है।
तुर्किये ने पहले ही संकेत दिया है कि वह समझौते के तहत सऊदी अरब की सैन्य जरूरतों को पूरा करने में तकनीकी सहायता सहित सहयोग कर सकता है। पाकिस्तान की ओर से भी समझौते के तहत प्रतिबद्धता दोहराई गई है। हालांकि, किसी बड़े सैन्य अभियान में प्रत्यक्ष भागीदारी की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है।
इसी वजह से रियाद में हुई सैन्य बैठक को समझौते को केवल राजनीतिक घोषणा से आगे ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में तत्काल सैन्य सहयोग को मजबूत करने की बात कही गई, लेकिन इसके व्यावहारिक स्वरूप को लेकर आगे की बैठकों और फैसलों का इंतजार रहेगा।
मक्का रक्षा समझौते की शुरुआत कैसे हुई?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है। समझौते के तहत किसी एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्यों के खिलाफ हमला माना जाएगा।
इसके बाद 31 अगस्त को इस्तांबुल में तीनों देशों के अधिकारियों की पहली रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की बैठक हुई। इसमें समझौते के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करने और रियाद में सचिवालय स्थापित करने पर सहमति बनी।










