मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम केमचंद सिंह ने कहा कि विकसित राज्य और मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए शांति बहाल करना जरूरी है। उन्होंने जातीय संघर्ष से पिछले तीन वर्षों में करीब 1,300 करोड़ रुपये के GST नुकसान और विकास पर पड़े असर का उल्लेख किया।
इंफाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम केमचंद सिंह ने कहा है कि राज्य को विकसित बनाने और मजबूत अर्थव्यवस्था तैयार करने का सबसे जरूरी रास्ता शांति बहाली से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि शांति और आर्थिक विकास एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं और लंबे समय तक जारी संकट का असर राज्य की अर्थव्यवस्था, विकास तथा लोगों की आजीविका पर पड़ा है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को सेनापति जिले के मराम स्थित डॉन बॉस्को कॉलेज के सिल्वर जुबली समारोह में यह बात कही। कार्यक्रम की थीम ‘हेरिटेज टू होराइजन्स’ थी। इस दौरान उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति, सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।
‘मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए शांति जरूरी’
मुख्यमंत्री केमचंद सिंह ने कहा कि विकसित मणिपुर और मजबूत अर्थव्यवस्था के निर्माण का एकमात्र रास्ता राज्य में शांति बहाल करना है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती रहेगी तो विकास कैसे संभव होगा।
मुख्यमंत्री ने जातीय संघर्ष के आर्थिक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में मणिपुर को GST संग्रह में करीब 1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उनके अनुसार, आर्थिक गतिविधियों में आए व्यवधान का असर विकास कार्यों के साथ-साथ लोगों की आजीविका पर भी पड़ा है, खासकर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों पर।
उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों की बहाली और विकास के लिए स्थायी शांति आवश्यक है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुए जातीय संघर्ष के बाद राज्य में सामान्य स्थिति और पुनर्वास को लेकर लगातार चर्चा जारी है।
‘मणिपुर की ताकत उसकी एकता में’
मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच एकता को मणिपुर की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि यदि लोग विभाजित रहते हैं तो राज्य की सामूहिक शक्ति कमजोर होगी।
उन्होंने इससे पहले भी यह बात कही है कि मणिपुर का विकास तभी संभव है, जब राज्य के सभी समुदायों के लोग साथ-साथ आगे बढ़ें। उनके मुताबिक, किसी एक समुदाय की प्रगति को राज्य के समग्र विकास के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मणिपुर विभिन्न समुदायों वाला राज्य है। उन्होंने समुदायों के बीच “गलतफहमी और संवाद की कमी” को विभिन्न समस्याओं में योगदान देने वाला एक कारण बताया।
उनका जोर इस बात पर था कि सामाजिक दूरी और संवाद की कमी को कम करने के लिए समुदायों के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
2023 से जारी संघर्ष का मानवीय असर
मणिपुर में जातीय हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी। यह संघर्ष मुख्य रूप से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हुआ। हालिया विधानसभा आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक कम से कम 306 लोगों की मौत हुई थी और 49 लोग अब भी लापता थे। यह आंकड़ा मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने सितंबर 2026 में विधानसभा में दिया था।
हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और राहत शिविरों तथा अस्थायी ठिकानों में रहना पड़ा। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 28,000 से अधिक लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे थे।
इस लंबे संकट ने राज्य के सामाजिक और आर्थिक जीवन को प्रभावित किया है। व्यापार, आवागमन, रोजगार और सामान्य आर्थिक गतिविधियों पर पड़े असर का जिक्र मुख्यमंत्री ने भी अपने संबोधन में किया।
शांति और विकास को साथ लेकर चलने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल आर्थिक योजनाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं है। विकास का लाभ तभी व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है, जब राज्य में स्थिर और शांतिपूर्ण माहौल हो।
उनके अनुसार, आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए लोगों का सुरक्षित महसूस करना, व्यापार और रोजगार का सामान्य होना तथा विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाल होना जरूरी है।
उन्होंने विकास को केवल सड़क, भवन और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं किया। मुख्यमंत्री ने सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण को भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पर्यावरण संरक्षण पर भी दिया संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मणिपुर के प्राकृतिक संसाधनों और जंगलों के संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने लोगों से राज्य के पर्यावरण की रक्षा करने की अपील की और कहा कि विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी निभाई जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी कोई पेड़ काटा जाए तो उसकी जगह दो या तीन पौधे लगाए जाने चाहिए। उनका संदेश था कि आर्थिक और बुनियादी विकास को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ आगे बढ़ाना होगा।
मणिपुर के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधन राज्य की पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों की आजीविका से भी जुड़े हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण को विकास योजनाओं के साथ जोड़ना मुख्यमंत्री के संबोधन का एक प्रमुख हिस्सा रहा।
तदुबी विधानसभा क्षेत्र में बनेगा स्टेडियम
मुख्यमंत्री ने सेनापति जिले के तदुबी विधानसभा क्षेत्र में एक स्टेडियम के निर्माण की भी घोषणा की।
स्टेडियम का प्रस्ताव स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाओं के विस्तार से जुड़ा है। मणिपुर में खेल प्रतिभाओं की मजबूत मौजूदगी रही है और राज्य के विभिन्न हिस्सों में खेल बुनियादी ढांचे का विकास युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
हालांकि, स्टेडियम की विस्तृत परियोजना लागत, निर्माण समयसीमा और सुविधाओं की जानकारी मुख्यमंत्री के इस संबोधन में सामने नहीं आई।
नई सरकार के सामने शांति बहाली बड़ी चुनौती
मणिपुर में फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद BJP नेता युमनाम केमचंद सिंह के नेतृत्व में नई निर्वाचित सरकार बनी। इसके बाद राज्य में शासन व्यवस्था और राजनीतिक प्रक्रिया फिर से सक्रिय हुई।
ऐसे में शांति बहाली, विस्थापित लोगों का पुनर्वास और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कायम करना सरकार के सामने प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
सितंबर 2026 में राज्य विधानसभा में पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि हिंसा का मानवीय प्रभाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। 306 मौतों और 49 लोगों के लापता होने का सरकारी आंकड़ा संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सितंबर में हिंसा से प्रभावित राहत शिविरों में हुई 34 अप्राकृतिक मौतों को लेकर चिंता जताई थी और राज्य सरकार से संबंधित मामलों में जांच तथा कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
आर्थिक पुनरुद्धार के लिए स्थिरता पर जोर
मुख्यमंत्री केमचंद का ताजा बयान आर्थिक पुनरुद्धार को शांति प्रक्रिया से जोड़ता है। उन्होंने GST संग्रह में करीब 1,300 करोड़ रुपये के नुकसान का उल्लेख करते हुए बताया कि संघर्ष ने राज्य की वित्तीय गतिविधियों को प्रभावित किया है।
मणिपुर के लिए चुनौती यह है कि आर्थिक विकास, सामाजिक पुनर्वास और शांति प्रक्रिया को एक साथ आगे बढ़ाया जाए। विस्थापित परिवारों की वापसी, आजीविका के अवसरों की बहाली और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में लोगों के बीच एकता और संवाद पर जोर देते हुए संकेत दिया कि सरकार विकास की प्रक्रिया को सभी समुदायों की भागीदारी से आगे बढ़ाना चाहती है।
‘सभी समुदायों की प्रगति जरूरी’
मुख्यमंत्री केमचंद सिंह ने कहा कि मणिपुर में विकास तभी संभव होगा, जब सभी समुदाय एक साथ प्रगति करें। उनके मुताबिक, राज्य की विविधता उसकी ताकत है और इस विविधता को सामाजिक एकता में बदलना जरूरी है।
मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष ने राज्य में गहरी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां पैदा की हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का शांति और विकास को एक-दूसरे से जोड़ना राज्य की मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
फिलहाल सरकार के सामने शांति बहाली के साथ आर्थिक गतिविधियों को सामान्य करने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और समुदायों के बीच संवाद को मजबूत करने की चुनौती बनी हुई है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इन प्रयासों के जरिए ही मणिपुर को एक मजबूत अर्थव्यवस्था और विकसित राज्य की दिशा में आगे ले जाया जा सकता है।











