मणिपुर के ईएमआरएस छात्रावास में छात्र कल्याण पर गंभीर सवाल, बाल अधिकार आयोग ने 48 घंटे में जांच रिपोर्ट मांगी

मणिपुर के ईएमआरएस छात्रावास में भोजन और छात्र कल्याण संबंधी शिकायतों पर MCPCR ने स्वतः संज्ञान लिया। 48 घंटे में जांच रिपोर्ट और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई।

मणिपुर बाल अधिकार संरक्षण आयोग (MCPCR) ने ईएमआरएस छात्रावास में भोजन की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति और छात्र कल्याण से जुड़े आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।

इम्फाल: मणिपुर में स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) के छात्रावास में छात्रों को पर्याप्त भोजन और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने के आरोपों ने प्रशासन को सक्रिय कर दिया है। मणिपुर बाल अधिकार संरक्षण आयोग (MCPCR) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए चुराचांदपुर के उपायुक्त और जनजातीय मामलों एवं पहाड़ी क्षेत्र निदेशालय को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिलता है कि छात्रावास में उपलब्ध खाद्यान्न वास्तविक छात्र और कर्मचारियों की संख्या के अनुरूप नहीं था, जिसके कारण आवश्यक खाद्य सामग्री की कमी उत्पन्न हो गई। आयोग ने इस मामले को बच्चों के अधिकार, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

नाश्ता नहीं मिलने और खाद्यान्न खत्म होने के आरोप

आयोग के अनुसार प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि छात्रावास में कई दिनों तक भोजन का पर्याप्त स्टॉक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को सुबह का नाश्ता तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका। खाद्यान्न समाप्त होने से छात्रों को नियमित भोजन देने में कठिनाई उत्पन्न हुई। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह आवासीय विद्यालयों में बच्चों के लिए निर्धारित न्यूनतम पोषण और देखभाल मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी जताई गई चिंता

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता पड़ी। वहीं कई अभिभावक अपने बच्चों को छात्रावास से घर ले गए क्योंकि उन्हें बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र सुरक्षा को लेकर चिंता थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि आवासीय विद्यालयों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सभी आवश्यक सुविधाएं बहाल करने के निर्देश

बाल अधिकार आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विद्यालय और छात्रावास का तत्काल निरीक्षण किया जाए तथा सभी छात्रों के लिए पर्याप्त भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं तुरंत बहाल की जाएं। आयोग ने यह भी कहा कि छात्रों के लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जिसमें वे बिना किसी भय या असुविधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

वास्तविक छात्र संख्या के अनुसार खाद्यान्न की जांच होगी

जांच के दौरान अधिकारियों को यह सत्यापित करने के लिए कहा गया है कि विद्यालय को उपलब्ध कराई गई खाद्य सामग्री वास्तविक छात्र और कर्मचारियों की संख्या के अनुरूप थी या नहीं।

इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि यदि किसी स्तर पर कमी हुई तो उसका कारण क्या था, किस अधिकारी या संस्था की जिम्मेदारी बनती है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए कौन-कौन से सुधारात्मक कदम आवश्यक हैं।

लापरवाही मिलने पर तय होगी जवाबदेही

आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही, संसाधनों के गलत प्रबंधन या जिम्मेदारी निभाने में विफलता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि बच्चों के अधिकारों का भविष्य में उल्लंघन न हो।

48 घंटे के भीतर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

मणिपुर बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने चुराचांदपुर के उपायुक्त और जनजातीय मामलों एवं पहाड़ी क्षेत्र निदेशक को 48 घंटे के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में निरीक्षण के निष्कर्ष, तत्काल उठाए गए कदम, उपलब्ध कराई गई सुविधाएं और भविष्य की कार्ययोजना का पूरा विवरण शामिल होगा।

सुरक्षित माहौल बनने के बाद ही लौटेंगे छात्र

आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि जिन छात्रों को उनके अभिभावक छात्रावास से घर ले गए हैं, उन्हें तभी वापस बुलाया जाए जब विद्यालय परिसर में सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित हो जाए। इसका उद्देश्य छात्रों और उनके परिवारों का विश्वास बहाल करना तथा शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना है।

कई विभागों को भेजी गई आयोग की सिफारिश

मामले के समन्वित समाधान के लिए आयोग ने अपने आदेश की प्रतियां सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक, चुराचांदपुर और बिष्णुपुर के पुलिस अधीक्षकों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी हैं। आयोग का मानना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है ताकि राहत और सुधारात्मक कार्रवाई तेजी से लागू की जा सके।

आवासीय विद्यालयों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल जैसी संस्थाएं दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित की गई हैं। ऐसे में भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कमी छात्रों के शैक्षणिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

यह मामला केवल एक छात्रावास तक सीमित नहीं है, बल्कि आवासीय विद्यालयों की निगरानी, संसाधनों के प्रबंधन और जवाबदेही की व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है। अब सभी की नजर 48 घंटे में आने वाली जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर रहेगी।

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