मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना से पहले राज्य में NRC लागू करने की मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं की बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
इंफाल: मणिपुर में जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC लागू करने की मांग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। बीरेन सिंह ने यह जानकारी नई दिल्ली से लौटने के बाद इंफाल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
अमित शाह से मुलाकात में मणिपुर के मुद्दों पर चर्चा
एन. बीरेन सिंह ने बताया कि उन्होंने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने मणिपुर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उनके सामने रखा। इनमें राज्य की कथित जनसांख्यिकीय असमानता और NRC लागू करने की मांग प्रमुख रही।
बीरेन सिंह के अनुसार, उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले NRC लागू किया जाए। उनका कहना है कि इस कदम से राज्य में रहने वाले लोगों की नागरिकता से जुड़ी स्थिति को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि NRC को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री की प्रतिक्रिया सकारात्मक थी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि केंद्र सरकार इस मांग पर कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर जताई चिंता
मणिपुर में जनसंख्या के स्वरूप और कथित जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। बीरेन सिंह ने भी अमित शाह के साथ हुई बैठक में इस विषय को उठाया।
उनका कहना है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसंख्या के स्वरूप में हो रहे बदलावों को समझना और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में उन्होंने NRC को जनगणना से पहले लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बीरेन सिंह के मुताबिक, बैठक में मणिपुर से जुड़े कई अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, उन्होंने उन सभी मुद्दों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया।
NRC क्या है और मणिपुर में इसकी मांग क्यों उठ रही है?
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC का उद्देश्य किसी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना है। इसका मुद्दा विशेष रूप से उन राज्यों में संवेदनशील माना जाता है, जहां अवैध प्रवासन, सीमा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर लंबे समय से चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं। मणिपुर की स्थिति भौगोलिक और राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं म्यांमार से लगती हैं और यहां लंबे समय से अवैध घुसपैठ तथा सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं।
बीरेन सिंह का ताजा बयान इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, NRC लागू करना एक व्यापक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया है, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर कई चरणों में निर्णय की आवश्यकता होगी।
जनगणना से पहले NRC की मांग क्यों महत्वपूर्ण?
जनगणना किसी देश की आबादी से जुड़े आंकड़े जुटाने की व्यापक प्रक्रिया होती है। इसमें जनसंख्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति सहित कई पहलुओं की जानकारी एकत्र की जाती है। ऐसे में बीरेन सिंह की मांग यह है कि NRC की प्रक्रिया जनगणना से पहले पूरी की जाए।
उनके अनुसार, इससे राज्य में नागरिकता और आबादी से संबंधित स्थिति का अधिक स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। हालांकि, NRC और जनगणना अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं और दोनों के उद्देश्य भी अलग होते हैं। बीरेन सिंह ने अपनी मांग को मणिपुर के भविष्य और राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति से जोड़कर देखा है।
केंद्र के रुख पर टिकी नजर
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि केंद्र सरकार बीरेन सिंह की मांग पर आगे क्या कदम उठाती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अमित शाह की प्रतिक्रिया को सकारात्मक बताया है, लेकिन फिलहाल केंद्र की ओर से NRC लागू करने को लेकर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
यदि केंद्र सरकार इस मांग पर औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाती है तो मणिपुर में नागरिकता सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर काम शुरू हो सकता है। वहीं, NRC जैसा विषय राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील भी है। इसलिए किसी भी निर्णय का असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ विभिन्न समुदायों और नागरिक संगठनों के बीच बहस पर पड़ सकता है।
मणिपुर की मौजूदा स्थिति के बीच अहम बयान
मणिपुर लंबे समय से जातीय और सामाजिक तनाव से जूझता रहा है। ऐसे माहौल में जनसांख्यिकीय बदलाव, सीमा सुरक्षा और नागरिकता जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का अमित शाह से मुलाकात के बाद दिया गया बयान इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने केंद्र के सामने NRC की मांग रखने के साथ राज्य की जनसंख्या संरचना से जुड़े सवाल भी उठाए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र सरकार इस मांग को किस रूप में आगे बढ़ाएगी। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से कोई औपचारिक घोषणा होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
बीरेन सिंह ने क्या कहा?
नई दिल्ली से लौटने के बाद इंफाल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में बीरेन सिंह ने कहा कि अमित शाह के साथ उनकी बैठक में NRC प्रमुख मुद्दों में शामिल था। उन्होंने दावा किया कि जनगणना से पहले NRC कराने की उनकी मांग पर केंद्रीय गृह मंत्री की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।
फिलहाल यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से सामने आया है और केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे में NRC को लेकर आगे की स्थिति सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।











