मार्च का मौसम: दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा

Delhi NCR और उत्तर भारत में मार्च के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। India Meteorological Department ने भारी बारिश, तेज हवाओं और संभावित मौसम संबंधित

Delhi NCR, Uttar Pradesh, Rajasthan समेत कई राज्यों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। मार्च की शुरुआत में लोग अपने गर्म कपड़े पैक कर चुके थे, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम में अचानक बदलाव आया है। 

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम ने मार्च के मध्य में एक बार फिर करवट ली है। राजधानी में पिछले दो दिनों से तेज हवाओं और झमाझम बारिश के चलते तापमान में लगभग 6-7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 16 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह दुर्लभ पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय है, जिससे अगले कुछ दिनों तक बारिश, गरज-चमक और तूफानी हवाओं की संभावना बनी हुई है।

मौसम का 7-दिन का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार:

  • 21 और 22 मार्च: आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा।
  • 23 से 25 मार्च: मौसम साफ रहने और धूप खिलने की संभावना।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रणाली दुर्लभ है और इसका असर कम होने के बाद फिर से तापमान में वृद्धि हो सकती है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण

जलवायु विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उत्तर भारत में एक असामान्य पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। उनकी जानकारी के अनुसार, यह प्रणाली हजारों किलोमीटर तक फैली एक लंबी निम्न दबाव रेखा के रूप में दिखाई दे रही है। इसमें तेज आंधी, गरज वाले बादल और ओलावृष्टि पैदा करने की क्षमता है।

मौसम विशेषज्ञ नवदीप दहिया ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से तीव्र हो गया है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और चंडीगढ़ में शाम तक मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर ठंड बढ़ने की भी संभावना है। उत्तर प्रदेश के आंतरिक इलाकों में भारी बारिश और तूफानी हवाओं की चेतावनी दी गई है, जिससे लखनऊ, कानपुर और आसपास के शहर प्रभावित हो सकते हैं।

डॉ. प्रदीप ने यह भी बताया कि अगले 6-8 घंटे उत्तर भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि मौसम प्रणाली की सबसे तीव्र निम्न दबाव रेखा इस क्षेत्र के बहुत करीब है। पूर्वी भारत में भी बारिश का नया दौर शुरू हो गया है।

23-28 मार्च के दौरान मौसम की गतिविधियां

मौसम विशेषज्ञ प्रोफेसर आर.वी. के अनुसार, दोपहर के बाद प्रणाली पश्चिम की ओर शिफ्ट होगी, लेकिन 23 और 28 मार्च के आसपास और भी सक्रिय मौसम प्रणाली आ सकती हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि मार्च की शुरुआत की गर्मी से मिली राहत अस्थायी है। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम होने के बाद अधिकतम तापमान फिर से बढ़ सकता है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्यों में ओलावृष्टि, तेज हवाएं और तूफानी बारिश के कारण संभावित नुकसान को लेकर चेतावनी जारी की है। प्रमुख जोखिम इस प्रकार हैं:

  • खेती पर प्रभाव: गेहूं, सरसों, सब्जियां और फल की फसलें खराब हो सकती हैं।
  • हवाओं का खतरा: 40–70 किमी/घंटा की रफ्तार, कुछ स्थानों पर 80–90 किमी/घंटा तक तेज हवाएं चल सकती हैं। पेड़, बिजली के खंभे गिरने और घरों को नुकसान होने का खतरा।
  • भूस्खलन का खतरा: पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की संभावना।
  • जनहानि का खतरा: खुले क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के लिए तेज हवाओं और गरज-चमक के कारण खतरा।

मार्च 2026 में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने उत्तर भारत में असामान्य मौसम का संकेत दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रणाली दुर्लभ है और इसके चलते अगले हफ्ते तक भारी बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवाएं और तूफानी मौसम बने रह सकते हैं। किसानों, ग्रामीण इलाकों और शहरों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग के दिशानिर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।

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