🇮🇳 शहीद बेटे के ताबूत से लिपटकर रोई मां, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि; असम विमान हादसे में हुई थी मौत

असम विमान हादसे में शहीद हुए जवान का अलीगढ़ में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। मां ताबूत से लिपटकर रो पड़ीं, बड़े भाई ने मुखाग्नि दी।
🇮🇳 शहीद बेटे के ताबूत से लिपटकर रोई मां, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि; असम विमान हादसे में हुई थी मौत
Photo Credit / Attribution: Google

अलीगढ़। असम में हुए विमान हादसे में जान गंवाने वाले शहीद जवान का मंगलवार को अलीगढ़ में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा ताबूत उनके घर पहुंचा, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मां अपने बेटे के ताबूत से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

अलीगढ़ के शहीद जवान को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। गांव और आसपास के इलाकों से लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे और "भारत माता की जय" तथा "शहीद अमर रहें" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

परिवार के लिए यह पल बेहद दर्दनाक था। मां बार-बार बेटे के चेहरे को निहारती रहीं और बिलखते हुए कहती रहीं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इस तरह तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा। पिता और अन्य परिजन भी गहरे सदमे में नजर आए। रिश्तेदार और गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे।

अंतिम संस्कार की रस्में पूरे सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुईं। सेना के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद बड़े भाई ने नम आंखों से अपने छोटे भाई को मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।

बताया जा रहा है कि शहीद जवान बचपन से ही देशसेवा का सपना देखते थे। उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा पूरे इलाके में होती थी। गांव के लोगों ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर दुख जरूर है, लेकिन इस बात का गर्व भी है कि उसने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

असम में हुए विमान हादसे के बाद से ही परिवार और गांव के लोग बेसब्री से उनके पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई अंतिम दर्शन करना चाहता था।

स्थानीय प्रशासन और सेना के अधिकारियों ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। अधिकारियों ने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। कई जनप्रतिनिधि भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और शहीद के बलिदान को देश के लिए अमूल्य बताया।

शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों का कहना था कि देश अपने वीर जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। गांव के युवाओं ने भी शहीद से प्रेरणा लेने की बात कही। कई लोगों ने मांग की कि गांव में शहीद के नाम पर स्मारक बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें।

मां की आंखों से बहते आंसू और ताबूत से लिपटकर रोने का दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को झकझोर गया। पूरे गांव ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी और एक स्वर में कहा— "शहीद अमर रहें।"

 
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