अप्रैल का महीना शुरू होते ही मौसम का मिजाज बदलने लगा है और गर्मी का दौर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। India Meteorological Department ने भीषण गर्मी और लू को लेकर भविष्यवाणी जारी की है।
Weather: भारत में गर्मी का मौसम धीरे-धीरे चरम पर पहुंच रहा है और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अप्रैल से जून 2027 तक के मौसम के लिए अहम अपडेट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार कई हिस्सों में दिन के मुकाबले रातें ज्यादा गर्म रहने की संभावना है और लू के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहेगी। वहीं, बारिश की स्थिति को लेकर भी IMD ने विस्तृत जानकारी साझा की है।
लू के बढ़ने के संकेत
IMD प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अप्रैल से जून के दौरान देश के कई हिस्सों में लू सामान्य से ज्यादा रहेगी। राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तटीय तमिलनाडु और उत्तरी कर्नाटक में भीषण गर्मी और लू के दिनों में इजाफा होने की संभावना है। दिल्ली-NCR समेत अन्य उत्तरी राज्यों में भी लू के थपेड़े अधिक महसूस किए जाएंगे।
मौसम विभाग के मुताबिक, लू का असर 2 से 8 दिन तक सामान्य से अधिक रह सकता है। दिन का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है, लेकिन रातें सामान्य से ज्यादा गर्म रहेंगी। पूर्वी, पूर्वोत्तर और तटीय प्रायद्वीपीय भारत में भी लू के प्रभाव के दिनों में वृद्धि होने की संभावना है।
बारिश का पूर्वानुमान
बारिश के मामले में IMD ने कहा है कि अप्रैल महीने में उत्तर-पश्चिमी भारत सहित कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा वर्षा हो सकती है। जिन राज्यों में दिन का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहेगा, वहां रातें अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म रहेंगी। मृत्युंजय महापात्र ने यह भी स्पष्ट किया कि मॉनसूनी मौसम के बारे में अभी कोई सुनिश्चित जानकारी नहीं दी जा सकती।
अप्रैल से जून के दौरान अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में रात का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है।

अल नीनो का असर और मॉनसून
IMD के मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुसार, अप्रैल-जून के दौरान अल नीनो-साउदर्न ऑस्किलेशन (ENSO) की स्थितियां तटस्थ रहेंगी। हालांकि, अगस्त-सितंबर में अल नीनो प्रभाव बढ़ने की संभावना है, जो मॉनसून के बाद बारिश पर असर डाल सकता है। IMD अप्रैल के मध्य में मॉनसून की पहले फेज की भविष्यवाणी जारी करने की उम्मीद जता चुका है।
IMD के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में खराब मौसम के कारण 45 लोगों की मौत हुई। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम, छत्तीसगढ़ और केरल में बिजली गिरने से 32 लोगों की जान गई। मार्च में आठ पश्चिमी विक्षोभों ने देश को प्रभावित किया, जबकि सामान्यतः यह संख्या पांच से छह रहती है।
11 से 31 मार्च के बीच छह पश्चिमी विक्षोभों ने उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित किया, जिससे गरज-चमक, बिजली गिरने, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के साथ हल्की से मध्यम बारिश हुई। इस दौरान अधिकतम तापमान में गिरावट आई और देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम अस्थिर रहा।









