मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। Bharatiya Janata Party ने सभी तीनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, जिसमें तीसरे उम्मीदवार की घोषणा नामांकन के अंतिम दिन यानी 8 जून को की गई।
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने तीसरे उम्मीदवार की भी घोषणा कर दी है, जिसके बाद राज्य में चुनाव प्रक्रिया और दिलचस्प हो गई है। अब इन तीनों सीटों के लिए 18 जून को मतदान और मतगणना दोनों आयोजित किए जाएंगे।
भाजपा के इस कदम के बाद कांग्रेस खेमे में राजनीतिक रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर दबाव डालने का आरोप बताया है।
भाजपा ने तीनों सीटों पर उतारे उम्मीदवार
भाजपा ने नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून को अपने तीसरे उम्मीदवार की घोषणा कर दी। इससे पहले पार्टी दो नामों की घोषणा कर चुकी थी। तीनों उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के बाद अब राज्यसभा चुनाव में मुकाबला पूरी तरह प्रतिस्पर्धी हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम राज्य में अपनी मजबूत स्थिति को और स्पष्ट करने तथा राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा है।
तीन सीटों पर चुनाव होने के कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना भी चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे चुनावों में पार्टी व्हिप के बावजूद कुछ विधायक अलग रुख अपना सकते हैं, जिससे परिणाम प्रभावित हो सकता है। इसी आशंका को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों से लगातार संपर्क में हैं और आंतरिक रणनीति को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

18 जून को मतदान और मतगणना
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 जून 2026 को होगा और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी। यह चुनाव राज्य की 230 सदस्यीय विधानसभा के गणित पर आधारित होगा, जहां बहुमत की स्थिति निर्णायक भूमिका निभाती है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा के तीसरे उम्मीदवार उतारे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने का प्रयास है।
पटवारी ने कहा कि भाजपा द्वारा तीन उम्मीदवार उतारना राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि “लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास” है। उन्होंने इसे “विधायकों पर प्रभाव डालने की कोशिश” बताते हुए आरोप लगाया कि इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।











