मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का असर बढ़ गया है। मैहर में 5वीं तक स्कूल बंद किए गए हैं और भोपाल सहित 9 शहरों में वॉर्म नाइट अलर्ट जारी हुआ है। इंदौर-ग्वालियर में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पार पहुंच गया है।
इंदौर: मध्यप्रदेश में अप्रैल के महीने में ही गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई शहरों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। खासकर इंदौर और ग्वालियर में पारा लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है।
भीषण गर्मी के कारण प्रशासन ने कई क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है, जबकि मौसम विभाग ने राजधानी भोपाल सहित 9 शहरों में ‘वॉर्म नाइट’ अलर्ट जारी किया है।
मैहर में 5वीं तक के स्कूल बंद
गर्मी की गंभीर स्थिति को देखते हुए मैहर जिले में प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने आदेश जारी करते हुए प्री-प्राइमरी से कक्षा 5वीं तक के सभी स्कूलों को 21 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक बंद रखने का निर्णय लिया है।
यह आदेश सरकारी, निजी, सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालयों सहित सभी स्कूलों पर लागू रहेगा। प्रशासन ने यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है, क्योंकि तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है।
6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं सीमित समय में चलेंगी
कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे से 12:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। शिक्षकों को दोपहर 1:30 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पहले से निर्धारित परीक्षाएं और शैक्षणिक कार्यक्रम यथावत रहेंगे। प्रशासन का कहना है कि बच्चों को अत्यधिक गर्मी से बचाना प्राथमिकता है।
क्या है ‘वॉर्म नाइट’ अलर्ट?
मौसम विभाग के अनुसार, जब रात का तापमान सामान्य से काफी अधिक रहता है, तो उसे ‘वॉर्म नाइट’ कहा जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब:
- रात का तापमान सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक हो
- दिन का तापमान 40°C या उससे अधिक रहे
इस स्थिति में रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलती और शरीर को आराम नहीं मिल पाता। भोपाल समेत 9 शहरों में इस प्रकार की स्थिति देखी जा रही है।

कई शहरों में तापमान 43 डिग्री तक पहुंचा
प्रदेश में सोमवार को भीषण गर्मी का असर स्पष्ट दिखा। कई शहरों में तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
- खजुराहो में 43°C
- ग्वालियर में 42.5°C
- दतिया में 42.3°C
- रतलाम और सीधी में 42.2°C
- रीवा और श्योपुर में 42°C
- रायसेन में 41.6°C
- नौगांव में 41.5°C
राजधानी भोपाल में तापमान 39.8°C दर्ज किया गया, जबकि इंदौर और उज्जैन में भी गर्मी का असर तेज रहा।
गर्मी के बीच मौसम में हल्का बदलाव भी
प्रदेश के कुछ हिस्सों में पिछले दिनों बारिश और गरज-चमक की स्थिति भी देखने को मिली। इंदौर, सीहोर, नर्मदापुरम, उज्जैन, गुना और बड़वानी सहित कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे कुछ समय के लिए मौसम में राहत मिली।
हालांकि, यह राहत अस्थायी रही और उसके बाद तापमान फिर तेजी से बढ़ गया।
मौसम परिवर्तन के पीछे कारण
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान स्थिति का कारण एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ एक्टिविटी है, जो प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में सक्रिय है। इसके अलावा दक्षिणी जिलों में भी आंधी और बारिश की स्थिति बनी रही।
इसके साथ ही 23 अप्रैल को एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने की संभावना है, हालांकि इसका असर मध्यप्रदेश पर सीमित रहने का अनुमान है।
स्वास्थ्य पर असर और प्रशासन की चेतावनी
लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। प्रशासन ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि:
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
- दोपहर में धूप से बचें
- हल्के और सूती कपड़े पहनें
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
हीटवेव के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
पिछले वर्षों का गर्मी रिकॉर्ड
मध्यप्रदेश में अप्रैल महीने में गर्मी का इतिहास काफी तीव्र रहा है।
- भोपाल में 1996 में तापमान 44.4°C तक पहुंचा था
- इंदौर में 1958 में 44.6°C दर्ज किया गया
- जबलपुर में 1970 में 45.4°C का रिकॉर्ड तापमान रहा
- ग्वालियर में 46°C से अधिक तापमान भी दर्ज हो चुका है
यह आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल और मई महीने राज्य के सबसे गर्म महीनों में शामिल हैं।
किसानों और आम जनता पर असर
इस भीषण गर्मी का असर केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों और कृषि पर भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है। तेज धूप और बढ़ते तापमान से फसलें प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
कई इलाकों में पानी की मांग बढ़ गई है, जिससे जल संकट की स्थिति भी बनने लगी है।











