महाराष्ट्र में राजनीति और कला के मेल का अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद के विदाई समारोह में अपना आखिरी भाषण दिया।
मुंबई: महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्य मई महीने में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इस अवसर पर आयोजित विदाई समारोह में Uddhav Thackeray ने भावुक अंदाज में अपना मनोगत व्यक्त किया। इस मौके पर उनके साथ Neelam Gorhe, Amol Mitkari, Shashikant Shinde, Ranjitsinh Mohite-Patil और Sanjay Kenekar समेत अन्य सदस्य भी इस सूची में शामिल हैं।
विदाई समारोह और उपस्थित सदस्य
महाराष्ट्र विधान परिषद में इस साल मई महीने में कुल 9 सदस्य सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। विदाई समारोह में उद्धव ठाकरे के अलावा नीलम गोह्रे, अमोल मिटकरी, शशिकांत शिंदे, रणजीतसिंह मोहिते पाटील और संजय केनेकर समेत अन्य सदस्य शामिल थे। समारोह में सभी ने ठाकरे के योगदान को याद करते हुए उन्हें सम्मानित किया।
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने कहा, "मेरा स्वभाव राजनीति का नहीं, बल्कि कलाकार का है।" उन्होंने हल्के अंदाज में यह भी पूछा कि जब लोग उन्हें इतने अच्छे से जानते हैं, तो आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति आई कि उन्हें किसी का हाथ पकड़ना पड़ा। उनके इस बयान को राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
ठाकरे ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने अचानक कई जिम्मेदारियां आईं। उन्होंने माना कि उन जिम्मेदारियों से भागना सही नहीं था और उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ सेवा की। उन्होंने मंत्रिमंडल सहयोगियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विशेष धन्यवाद किया।
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युवाओं पर जोर: ‘बुवा शक्ति नहीं, युवा शक्ति जरूरी’
ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को धन्यवाद देते हुए एक पुराना प्रसंग याद किया। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में स्वार्थ के लिए मूल्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर एक संकेत के रूप में देखी जा रही है। अपने भाषण में ठाकरे ने युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेताओं को मिलकर ढोंगी बाबाओं के बजाय युवाओं की शक्ति को मजबूत करना चाहिए। उनके मुताबिक, असली चमत्कार कोई बाबा नहीं, बल्कि देश के युवा कर सकते हैं।
ठाकरे ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल की कई यादें साझा कीं। उन्होंने मंत्रालय में प्रवेश के पहले दिन और ‘वर्षा’ बंगला छोड़ते समय महाराष्ट्रवासियों का स्नेह याद किया। उनका कहना था कि ऐसा स्नेह हर किसी को नहीं मिलता। उन्होंने अपने कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का भी जिक्र किया। इनमें रायगढ़ के लिए फंड का आवंटन, औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करना, कोविड के दौरान मुंबई मॉडल और टास्क फोर्स का गठन, किसान कर्ज माफी, शिवभोजन थाली योजना, समृद्धि महामार्ग और मेट्रो परियोजनाओं को जारी रखना, और मराठी भाषा को अनिवार्य करना शामिल हैं।









