भारत की संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं किया जा सका, जिसके बाद देश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। इस मुद्दे ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर गहरी राजनीतिक खाई को उजागर कर दिया है।
मुंबई: Rahul Gandhi को लेकर संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर हुई बहस के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका था, जिसके बाद पूरे मामले पर सियासी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बहस के दौरान राहुल गांधी ने यह कहा था कि वे इस बिल का विरोध करेंगे, जिससे संसद के भीतर चर्चा और तेज हो गई थी। इसके बाद इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
इसी बीच Sanjay Raut, जो Shiv Sena (UBT) के सांसद हैं, ने राहुल गांधी के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक आंदोलन का नेतृत्व किया है और वे एक प्रभावशाली नेता हैं।
राहुल गांधी को लेकर संजय राउत का बयान
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे संविधान संशोधन के तहत पेश किया गया था, संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल राजनीतिक लाभ और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर लाया गया था, जबकि सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी ने लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, विपक्ष ने मिलकर सरकार की “राजनीतिक रणनीति” को रोकने का काम किया। राउत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी देश के प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं और उनके नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे पर मजबूत रुख अपनाया।

सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
संजय राउत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट और बयान में केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल के पीछे राजनीतिक मंशा थी।उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक परिसीमन और चुनावी समीकरणों को बदलने की रणनीति का हिस्सा था। उनके अनुसार, सरकार इसका उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहती थी। राउत ने दावा किया कि संसद में यह रणनीति सफल नहीं हो सकी और विपक्ष ने इसे रोक दिया।
संजय राउत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को वे लोकतंत्र की जीत के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार, यह दिखाता है कि किसी भी सरकार की शक्ति संविधान से ऊपर नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह घटनाक्रम सत्ता संतुलन में बदलाव का संकेत है और आने वाले समय में राजनीतिक परिदृश्य और बदल सकता है।
परिसीमन और राजनीतिक मैप पर बहस
महिला आरक्षण विधेयक पर बहस के दौरान परिसीमन (Delimitation) का मुद्दा भी प्रमुख रूप से सामने आया। विपक्ष का आरोप है कि इसके जरिए राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। संजय राउत ने कहा कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है, जिससे कुछ राज्यों की राजनीतिक ताकत सीमित हो जाएगी जबकि कुछ राज्यों का प्रभाव बढ़ जाएगा।











