₹1 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, मेधावी छात्र से देश के मोस्ट वांटेड नक्सली बनने की कहानी

झारखंड में ₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार। उस पर कई राज्यों में 150 से अधिक मामले दर्ज हैं, सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।

झारखंड में सुरक्षा बलों ने ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया है। गिरिडीह के एक साधारण गांव से निकलकर माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने वाले बेसरा की कहानी शिक्षा, उग्रवाद, परिवार से दूरी और दशकों तक चले नक्सली नेटवर्क से जुड़ी रही।

रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरिडीह के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल होने तक का उसका सफर कई दशकों की उग्रवादी गतिविधियों, पारिवारिक दूरी और सुरक्षा एजेंसियों के साथ लंबे संघर्ष की कहानी बयां करता है।

मेधावी छात्र से माओवादी संगठन के शीर्ष नेता तक का सफर

गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव में वर्ष 1960 में जन्मे मिसिर बेसरा बचपन में एक मेधावी छात्र माने जाते थे। प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद उन्होंने धनबाद में राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। इसी दौरान झारखंड आंदोलन और वामपंथी विचारधारा के प्रभाव में आकर उनका झुकाव उग्रवाद की ओर बढ़ा। बाद में उन्होंने माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) का दामन थाम लिया। वर्ष 2004 में एमसीसी और पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) के विलय के बाद बने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) में उन्होंने तेजी से संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं और पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा विभिन्न नामों से सक्रिय रहा और उसके खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय तक वह सुरक्षा बलों के लिए सबसे वांछित माओवादी नेताओं में गिना जाता रहा।

परिवार से दूरी और उग्रवाद की राह

युवावस्था में मिसिर बेसरा ने मोनासी देवी से विवाह किया था। उनका एक पुत्र सिद्धार्थ है, जो वर्तमान में दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करता है। परिवार के अनुसार, माओवादी संगठन में शामिल होने के बाद बेसरा घर से लगभग पूरी तरह अलग हो गया। सिद्धार्थ ने कई बार अपने पिता से मुख्यधारा में लौटने की अपील की, लेकिन वर्षों तक दोनों के बीच मुलाकात नहीं हो सकी।

माओवादी संगठन के भीतर भी समय-समय पर आत्मसमर्पण को लेकर चर्चा होती रही। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संगठन के वरिष्ठ नेता किशनजी ने भी एक पत्र में संगठन की बदलती परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आत्मसमर्पण पर विचार करने की सलाह दी थी। हालांकि मिसिर बेसरा ने उग्रवाद का रास्ता नहीं छोड़ा।

बड़े हमलों का आरोप और गिरफ्तारी को बड़ी सफलता माना जा रहा

झारखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 के दशक में मिसिर बेसरा पर सुरक्षा बलों के खिलाफ कई बड़े हमलों की रणनीति तैयार करने का आरोप लगा। वर्ष 2003 और 2004 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा क्षेत्र में हुए आईईडी विस्फोटों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। जांच एजेंसियां इन घटनाओं सहित कई बड़े नक्सली अभियानों में उसकी भूमिका की जांच करती रही हैं। उसका नाम वर्ष 2009 के चर्चित लखीसराय पुलिस हिरासत से फरार कराने की घटना से भी जोड़ा जाता है।

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान माओवादी नेटवर्क, संगठन की गतिविधियों और कई लंबित मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

गौरतलब है कि इस कार्रवाई से पहले झारखंड पुलिस के समक्ष 16 माओवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया था। इनमें छह पर कुल ₹39 लाख का इनाम घोषित था। पुलिस का कहना है कि राज्य में उग्रवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और शेष वांछित माओवादियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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